Aluminium Can BIS Deadline: बेवरेज कंपनियों को बड़ी राहत, सरकार ने डेडलाइन **2027** तक बढ़ाई

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AuthorNeha Patil|Published at:
Aluminium Can BIS Deadline: बेवरेज कंपनियों को बड़ी राहत, सरकार ने डेडलाइन **2027** तक बढ़ाई

सरकार ने एल्युमीनियम बेवरेज कैन (Aluminium Beverage Cans) के लिए अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन की डेडलाइन को **1 अप्रैल, 2027** तक टाल दिया है। इस फैसले से बेवरेज सेक्टर को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से सप्लाई चेन की चुनौतियों और महंगे इम्पोर्ट (Imports) से जूझ रहा था।

सरकार ने अनिवार्य ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) सर्टिफिकेशन पर 6 महीने की मोहलत देकर बेवरेज और ब्रुअरी इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी है। अब बड़ी कंपनियों के पास क्वालिटी नॉर्म्स को पूरा करने के लिए 1 अप्रैल, 2027 तक का समय है। यह नियामक बदलाव उन घरेलू कंपनियों के लिए बेहद अहम है, जो लगातार कच्चे माल की कमी और बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों से परेशान थीं।

इम्पोर्ट का दबाव और मार्जिन पर चोट

इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती एल्युमीनियम पैकेजिंग की बढ़ती मांग है, जिसे घरेलू उत्पादन पूरा नहीं कर पा रहा है। स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स के पास क्षमता की कमी के कारण कंपनियां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और श्रीलंका जैसे देशों से इम्पोर्ट करने पर मजबूर हैं। ये इम्पोर्ट न केवल लॉजिस्टिक के लिहाज से जटिल हैं, बल्कि घरेलू विकल्पों की तुलना में 25% से 30% तक महंगे भी पड़ते हैं। यह लागत का अंतर सीधे कंपनियों के नेट प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को प्रभावित कर रहा था।

ग्लोबल संकट और सप्लाई चेन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने पैकेजिंग मटेरियल की ग्लोबल उपलब्धता को भी बाधित किया है। गर्मी के मौसम में सॉफ्ट ड्रिंक्स और बीयर की भारी मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों को लगातार कंटेनर्स की जरूरत होती है। सरकार द्वारा डेडलाइन बढ़ाए जाने से कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन स्थिर करने और पर्याप्त इन्वेंट्री बनाने के लिए जरूरी समय मिल जाएगा, जिससे उत्पादन ठप होने का खतरा भी टल गया है।

निवेशकों के लिए सबक

निवेशकों के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि इससे शॉर्ट-टर्म में मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। हालांकि, जब तक घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में पर्याप्त इजाफा नहीं होता, तब तक इम्पोर्ट पर निर्भरता एक बड़ी चिंता बनी रहेगी। लॉन्ग-टर्म में अब निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनियां नई डेडलाइन से पहले अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ा पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.