केंद्र सरकार लिस्टेड इक्विटी पर लागू लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स ढांचे की समीक्षा कर रही है। वर्तमान में **₹1.25 लाख** से अधिक के मुनाफे पर **12.5%** टैक्स देना पड़ता है। हालांकि अभी कोई बदलाव आधिकारिक नहीं है, लेकिन बाजार में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
टैक्स ढांचे की समीक्षा पर सरकार का रुख
केंद्र सरकार टैक्स नीतियों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की समीक्षा कर रही है। वर्तमान में, 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड किए गए शेयरों पर ₹1.25 लाख से ज्यादा के मुनाफे पर निवेशकों को 12.5% का टैक्स चुकाना पड़ता है। यह दर 2024-25 के यूनियन बजट के बाद लागू की गई थी।
बाजार में क्यों है घबराहट?
भारत में LTCG टैक्स का इतिहास बदलावों से भरा रहा है, जिससे अक्सर निवेशक चिंतित हो जाते हैं। 2018 के बजट में 10% के साथ इसकी वापसी से पहले, यह लंबे समय तक टैक्स-फ्री था। तब से, टैक्स दर में किसी भी बदलाव की खबर आते ही रिटेल और विदेशी निवेशकों की चिंताएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि यह सीधे उनके नेट रिटर्न पर असर डालता है।
विशेषज्ञों की क्या है सलाह?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी अफवाह के आधार पर अपनी पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी को नहीं बदलना चाहिए। टैक्स लायबिलिटी तभी बनती है जब आप शेयर बेचते हैं (Realized Gains), इसलिए कागजी मुनाफे पर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। निवेश का फैसला हमेशा एसेट एलोकेशन और रिस्क को ध्यान में रखकर लेना चाहिए, न कि टैक्स की अटकलों के आधार पर।
फिलहाल क्या करें निवेशक?
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सरकार की ओर से आने वाली आधिकारिक घोषणाओं का ही इंतजार करें। फिलहाल के लिए, 12.5% की टैक्स दर ही प्रभावी है। किसी भी अनिश्चितता के बजाय अपने लॉन्ग-टर्म गोल्स, सेक्टर ग्रोथ और कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान देना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
