सरकार ने INDIA ब्लॉक द्वारा राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मुलाकात के बाद लगाए गए चुनावी धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से आधारहीन बताया है, जबकि विपक्ष अब सबूतों के साथ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।
हाल ही में Rashtrapati Bhavan में विपक्ष के INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल और राष्ट्रपति Droupadi Murmu के बीच हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge जैसे दिग्गज नेताओं ने एक ज्ञापन सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की है। विपक्ष का मुख्य तर्क चुनावी रोल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' के दौरान कथित अनियमितताओं पर आधारित है।
चुनावी प्रक्रिया पर विवाद
विपक्ष का आरोप है कि Election Commission of India (ECI) ने व्यवस्थित तरीके से वैध मतदाताओं के नाम हटाए हैं। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने इन दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति ने चर्चा के दौरान पूरी तरह निष्पक्षता बनाए रखी और विपक्ष से इन दावों के पक्ष में ठोस दस्तावेज पेश करने को कहा है।
चुनाव आयोग ने अपना बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनावी रोल तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और बहु-चरणीय (multi-stage) है। आयोग ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक दलों के पास आपत्तियां दर्ज करने के लिए पर्याप्त अवसर होते हैं।
सरकार का रुख और कानूनी राह
सरकार ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि वे राष्ट्रपति कार्यालय को राजनीतिक विवादों में न खींचें। सरकार का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना गलत है। निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजनीतिक स्थिरता सीधे तौर पर आर्थिक भरोसे से जुड़ी होती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष क्या सबूत पेश करता है और क्या यह मामला आगे चलकर Supreme Court of India में कानूनी लड़ाई का रूप लेगा।
