Kanda Express: प्याज की कीमतों में लगी आग बुझाने के लिए सरकार का बड़ा दांव, दिल्ली में सस्ता मिलेगा प्याज

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AuthorMehul Desai|Published at:
Kanda Express: प्याज की कीमतों में लगी आग बुझाने के लिए सरकार का बड़ा दांव, दिल्ली में सस्ता मिलेगा प्याज

प्याज की कीमतों में साल-दर-साल **88%** की भारी बढ़ोतरी के बाद सरकार ने 'Kanda Express' के जरिए **453 टन** प्याज दिल्ली भेजा है। अब आम जनता को यह प्याज **₹35 प्रति किलो** की रियायती दर पर मिलेगा।

बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष लॉजिस्टिक ऑपरेशन शुरू किया है, जिसे 'Kanda Express' नाम दिया गया है। नासिक से दिल्ली पहुंची 453 टन की यह पहली खेप राजधानी में प्याज की खुदरा कीमतों को नीचे लाने के लिए भेजी गई है। फिलहाल दिल्ली में प्याज का भाव ₹62 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया था, जो पिछले साल के मुकाबले 88% अधिक है। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) मिलकर अब इसे ₹35 प्रति किलो की फिक्स्ड सब्सिडी दर पर बेच रहे हैं।

लॉजिस्टिक ऑपरेशन का विस्तार

यह पहल सरकार के 1.21 लाख टन के बफर स्टॉक का हिस्सा है, जिसे 'प्राइस स्टैबिलाइजेशन फंड' (Price Stabilisation Fund) से वित्तपोषित किया जा रहा है। साल 2024-25 में 14 रेक के जरिए 12,000 टन प्याज की ढुलाई हुई थी, जबकि 2025-26 के मौजूदा चक्र में अब तक 88,000 टन प्याज की आपूर्ति की जा चुकी है। दिल्ली के अलावा चेन्नई, गुवाहाटी, मदुरै और कोच्चि जैसे बड़े शहरों में भी इसी तरह से आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।

ऑपरेशनल चुनौतियां और जोखिम

हालांकि सरकार का कहना है कि देश में प्याज का उत्पादन 307 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है, लेकिन 'Kanda Express' के सामने कई बाधाएं हैं। लंबी दूरी की यात्रा में ट्रेन की देरी और प्याज की क्वालिटी खराब होने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। यदि ढुलाई के दौरान प्याज सड़ता है, तो इसकी मांग कम हो सकती है और सरकारी प्रयासों का असर सीमित हो जाएगा। साथ ही, बार-बार होने वाला यह सरकारी खर्च राजकोषीय दबाव भी बढ़ा रहा है।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

बाजार पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह देखना होगा कि यह सप्लाई चेन कितनी तेजी से असर दिखाती है। यदि आने वाले हफ्ते में खुदरा महंगाई के आंकड़ों में गिरावट आती है, तो यह हेडलाइन इन्फ्लेशन के लिए राहत की बात होगी। हालांकि, मौसम की मार और थोक बाजारों में संभावित कार्टेलिज्म (cartelization) के कारण निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इन अल्पकालिक उपायों पर निर्भरता कब तक बनी रहेगी, यह बड़ा सवाल है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.