नेशनल स्टीयरिंग कमेटी ने PM-SETU स्कीम के तहत **₹1,195 करोड़** की मंजूरी दी है। इस फंड से तीन राज्यों में पांच ITI क्लस्टर्स को आधुनिक बनाया जाएगा ताकि छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा सके।
सरकार ने तकनीकी शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नेशनल स्टीयरिंग कमेटी ने ₹1,194.92 करोड़ का निवेश मंजूर किया है, जो PM-SETU (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) स्कीम के तहत आता है। इस फंड से महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के पांच ITI क्लस्टर्स को हाई-टेक बनाया जाएगा। इस नई मंजूरी के बाद PM-SETU के तहत कुल निवेश बढ़कर ₹3,687 करोड़ तक पहुंच गया है।
प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर होगा बदलाव
इस प्रोजेक्ट में सरकार ने पांच बड़े नामी पार्टनर्स को जोड़ा है: Tata Steel Foundation, BVG India, Belrise Industries, Eagle Infra India, और Inderdeep Infra India। ये कंपनियां और सरकारी संस्थाएं मिलकर ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से बदलेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान न देकर उन्हें आज की इंडस्ट्री की डिमांड के मुताबिक जॉब-रेडी बनाना है।
'मेक इन इंडिया' के लिए क्यों है जरूरी?
सेक्रेटरी देबाश्री मुखर्जी ने स्पष्ट किया है कि इन क्लस्टर्स को ISO सर्टिफिकेशन हासिल करना होगा और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को WorldSkills मानकों के अनुरूप रखना होगा। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की कंपनियों के लिए स्किल्ड लेबर की कमी अक्सर ग्रोथ में बड़ी बाधा बनी रहती है, जिसे इस स्कीम के जरिए दूर करने की कोशिश की जा रही है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालांकि यह सेक्टर के लिए सकारात्मक खबर है, लेकिन निवेशकों को जमीनी स्तर की चुनौतियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का नवीनीकरण करने में देरी, ट्रेनर की कमी और बदली हुई तकनीक के साथ ट्रेनिंग मटेरियल को अपडेट रखना बड़ी चुनौतियां बनी रहती हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप कितनी तेजी से काम करती है और इसका प्लेसमेंट रिकॉर्ड कैसा रहता है। कुशल वर्कफोर्स तैयार होने से भविष्य में कंपनियों की हायरिंग और ट्रेनिंग कॉस्ट में कमी आ सकती है, जिस पर निवेशकों की नजर रहनी चाहिए।
