प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (PGTI) के CEO, अमंदीप जोहल, ने राज्य सरकारों से गोल्फ कोर्स को सिर्फ मनोरंजन की जगह नहीं, बल्कि 'इकोनॉमिक इंजन' के तौर पर देखने की अपील की है। उनका अनुमान है कि हर गोल्फ कोर्स प्रोजेक्ट से **$1 बिलियन** (लगभग **₹7,500 करोड़**) की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है। यह रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नए निवेश के संकेत दे रहा है।
गोल्फ कोर्स का 'डबल इंजन'
PGTI के CEO अमंदीप जोहल का मानना है कि गोल्फ कोर्स प्रोजेक्ट्स लोकल इकोनॉमी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। उनके मुताबिक, ये प्रोजेक्ट्स रियल एस्टेट डेवलपमेंट, टूरिज्म और फॉरेन इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने का एक बड़ा जरिया बनेंगे, जिससे हर कोर्स पर $1 बिलियन तक का सीधा आर्थिक फायदा हो सकता है।
सरकार और प्राइवेट सेक्टर की साझेदारी
इस मॉडल में सरकार की भूमिका जमीन उपलब्ध कराने की होगी, जबकि कंस्ट्रक्शन और मैनेजमेंट की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों की होगी। PGTI का सुझाव है कि इन प्रोजेक्ट्स को सिटी मास्टर प्लान में शुरुआत से ही शामिल किया जाना चाहिए, ताकि ये सेल्फ-सस्टेनिंग ग्रीन स्पेस बन सकें।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के निवेशकों के लिए यह खबर काफी मायने रखती है। DLF जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां पहले भी गोल्फ कोर्स को रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की नींव के तौर पर इस्तेमाल करती आई हैं। गोल्फ कोर्स का होना प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ाता है और यह इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की फैसिलिटी होने के कारण फॉरेन इन्वेस्टमेंट को भी आकर्षित करता है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि, इस मॉडल में कुछ चुनौतियां भी हैं। गोल्फ कोर्स बनाने में भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट और काफी जमीन की जरूरत होती है। साथ ही, पानी का ज्यादा इस्तेमाल और मेंटेनेंस का खर्चा भी एक बड़ी चिंता का विषय हो सकता है, खासकर पानी की कमी वाले इलाकों में। टिकाऊ और पानी बचाने वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल यहाँ कामयाबी की कुंजी होगा।
निवेशकों को अब सरकार की अर्बन डेवलपमेंट पॉलिसी और आने वाले लैंड टेंडर्स पर नजर रखनी होगी। PGTI की तरफ से पब्लिक-एक्सेस वाले गोल्फ कोर्स बनाने का सुझाव, इस बिज़नेस मॉडल की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए अहम साबित हो सकता है।
