साल 2026 में जहाँ Nifty इंडेक्स **12%** लुढ़क गया, वहीं Goldman Sachs द्वारा चिन्हित 42 'AI Enablers' कंपनियों ने **60%** की तूफानी बढ़त दर्ज की है। इन कंपनियों का फोकस पावर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जो साबित करता है कि भारत में AI का असली खेल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि फिजिकल यूटिलिटीज है।
मार्केट में बड़ा उलटफेर
साल 2026 में भारतीय इक्विटी मार्केट में बेंचमार्क इंडेक्स और उभरते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर के बीच गहरा अंतर देखने को मिला है। जहाँ ग्लोबल मार्केट्स में टेक-ड्रिवन तेजी रही, वहीं Nifty इंडेक्स 12% की गिरावट के साथ संघर्ष करता दिखा। इसकी मुख्य वजह इंडेक्स का बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और ट्रेडिशनल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर झुकाव है, जहां नई टेक कंपनियों की मौजूदगी बेहद कम है।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर का नया दौर
MSCI India इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, AI से जुड़ी इक्विटीज का वेटेज अभी महज 16% है। यह ताइवान, कोरिया और जापान जैसे देशों के मुकाबले काफी कम है। Goldman Sachs ने 42 ऐसी कंपनियों को चुना है, जिन्हें 'AI Enablers' कहा जा रहा है। इन कंपनियों ने मार्केट की सुस्ती को मात देते हुए 60% का शानदार मुनाफा कमाया है।
ग्लोबल स्तर पर जहां AI की रैली सॉफ्टवेयर और क्लाउड प्रोवाइडर्स के भरोसे है, भारत में कहानी बिल्कुल अलग है। यहाँ का AI इकोसिस्टम पावर इक्विपमेंट, यूटिलिटीज और डेटा सेंटर हार्डवेयर के इर्द-गिर्द घूम रहा है। निवेशक अब एनर्जी सिक्योरिटी और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को ही भारत में AI बूम का असली पैमाना मान रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह तेजी निवेशकों के लिए एक जटिल स्थिति भी पैदा कर रही है। जिन यूटिलिटी और हार्डवेयर कंपनियों में 60% का उछाल आया है, उनकी वैल्यूएशन अब अपने ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर है। जोखिम यह है कि यदि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी होती है या बिजली की मांग वैसी नहीं रहती, जैसी उम्मीद की गई थी, तो इन हाई-फ्लाइंग स्टॉक्स में बड़ी गिरावट भी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनियों के ऑर्डर बुक और डेटा सेंटर निर्माण की प्रगति पर बारीकी से नजर रखें।
