AI इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए दिग्गज़ Tech कंपनियां धुआंधार कर्ज ले रही हैं। साल **2026** तक यह आंकड़ा **$250 बिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे बॉन्ड मार्केट पर दबाव बढ़ गया है और निवेशकों के लिए जोखिम पैदा हो रहा है।
बॉन्ड मार्केट में क्यों मचा है हड़कंप?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में सबसे आगे रहने के लिए अब दिग्गज टेक कंपनियों ने अपनी रणनीति बदल ली है। Amazon, Microsoft, Alphabet, Meta और Oracle जैसी कंपनियां, जो पहले अपने पास मौजूद भारी-भरकम कैश से काम चलाती थीं, अब आक्रामक तरीके से कर्ज (Debt) ले रही हैं। डेटा के मुताबिक, साल 2026 तक इन कंपनियों द्वारा जारी किए गए बॉन्ड का आंकड़ा $250 बिलियन तक पहुंच सकता है।
बढ़ रहा है क्रेडिट रिस्क
इस भारी कर्ज के कारण बॉन्ड मार्केट में 'क्रेडिट स्प्रेड' 30 बेसिस पॉइंट्स (2025 में) से बढ़कर अब 40 बेसिस पॉइंट्स के आसपास पहुंच गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बॉन्ड मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी कम हो रही है। बॉन्ड 'कवर रेश्यो', जो पहले 5 गुना के करीब था, वह अब गिरकर 2 गुना से भी नीचे आ गया है।
निवेशकों के लिए क्या है खतरा?
- ब्याज दर का जोखिम: ज्यादा कर्ज का मतलब है कि ब्याज दरों में बदलाव का इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।
- पूरा इकोसिस्टम प्रभावित: यह रिस्क केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरर्स, यूटिलिटी कंपनियां और डेटा-सेंटर ऑपरेटर्स भी इस इंफ्रास्ट्रक्चर की होड़ में कर्ज बढ़ा रहे हैं।
- छिपा हुआ कर्ज: पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) और लीजिंग जैसे 'ऑफ-बैलेंस-शीट' कमिटमेंट्स कंपनियों के वास्तविक कर्ज के बोझ को और बढ़ा रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट कंपनी के प्रॉफिट में बदलता है या फिर बढ़ता कर्ज इन टेक दिग्गजों की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी पर लगाम लगा देता है।
