US ट्रेजरी यील्ड के अपने हालिया हाई लेवल से नीचे आने के बाद ग्लोबल मार्केट में बुधवार को राहत भरी तेजी देखी गई। हालांकि, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल निवेशकों के लिए अभी भी चिंता का सबब बना हुआ है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
बाजार की चाल और बॉन्ड यील्ड का गणित
बुधवार को Dow Jones और S&P 500 जैसे प्रमुख ग्लोबल इंडेक्स ने अपने 3 दिनों के गिरावट के सिलसिले को थाम लिया है। यह रिकवरी US ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के चलते हुई। ग्लोबल लेवल पर कर्ज की लागत तय करने वाले 10-year US Treasury yield का स्तर गिरकर 4.79% पर आ गया है, जो हाल ही में अपने मल्टी-ईयर हाई पर पहुंच गया था।
कच्चे तेल की चुनौती
बाजार में आई यह रिकवरी अस्थायी लग रही है क्योंकि US-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चा तेल (Brent crude) $95 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें देश के करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक पड़ेगा।
फेडरल रिजर्व और आगे की राह
निवेशकों की नजरें पूरी तरह से US फेडरल रिजर्व की अगली बैठक पर टिकी हैं। बाजार में 0.25% (25 basis points) की ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। सबकी नजरें अब शुक्रवार को आने वाले US जॉब्स डेटा पर हैं, जो फेड की अगली पॉलिसी का रुख तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
करेंसी मार्केट और भारतीय निवेशक
करेंसी मार्केट में भी भारी अस्थिरता है। जापानी येन में डॉलर के मुकाबले अचानक आई तेजी से बैंक ऑफ जापान पर ब्याज दरों में बदलाव का दबाव बढ़ा है। भारतीय निवेशकों के लिए सलाह है कि वे क्रूड ऑयल की कीमतों और अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा पर नजर रखें, क्योंकि अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का असर विदेशी निवेशकों (FIIs) के निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।
