मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल शिपिंग कॉस्ट में **130%** का भारी उछाल आया है। फ्रेट रेट्स **$4,500** प्रति यूनिट तक पहुंच गए हैं, जिससे भारतीय एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
फरवरी 2026 से ग्लोबल शिपिंग रेट्स में 130% की बड़ी उछाल देखने को मिली है, जो भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। साल की शुरुआत में जो फ्रेट कॉस्ट $2,000 से $2,500 प्रति कंटेनर थी, वह अब $4,000 से $4,500 के स्तर पर पहुंच गई है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण शिपिंग कंपनियों को लंबे और महंगे रूट का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसकी सीधी मार एक्सपोर्टर्स पर पड़ रही है।\n\n### एक्सपोर्ट वॉल्यूम में दम, लेकिन चुनौती बरकरार\nइन लॉजिस्टिक मुश्किलों के बावजूद, भारत का व्यापार मजबूत बना हुआ है। सितंबर में कंटेनर ट्रेड में सालाना आधार पर 23% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें अमेरिका की डिमांड का बड़ा हाथ रहा, जहां भारत का ट्रेड 48% बढ़ा है। हालांकि, मिडिल ईस्ट के देशों जैसे UAE और सऊदी अरब के साथ ट्रेड में 12% से 15% की गिरावट आई है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?\nटेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और फार्मा जैसे सेक्टर्स के सामने अब यह चुनौती है कि वे बढ़ते खर्च को खुद झेलें या ग्राहकों पर डालें। यदि कंपनियों के पास 'प्राइसिंग पावर' कम हुई, तो आने वाली तिमाहियों में उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है।\n\n### पोर्ट्स का हाल\nघरेलू पोर्ट्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर में बड़े भारतीय पोर्ट्स में कार्गो थ्रूपुट में 13% की तेजी दिखी है। गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के पोर्ट्स में 3% से 7% के बीच ग्रोथ रही, जबकि पूर्वी तट के पोर्ट्स में ट्रैफिक थोड़ा कम हुआ है। अब निवेशकों की नजर स्वेज नहर (Suez Canal) के रास्तों के सामान्य होने पर टिकी है, क्योंकि इसी से लॉजिस्टिक लागत में राहत की उम्मीद की जा सकती है।
