Global Market Update: AI Stocks से पैसा निकाल रहे दिग्गज निवेशक, US Treasuries में बढ़ी हलचल

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AuthorAditya Rao|Published at:
Global Market Update: AI Stocks से पैसा निकाल रहे दिग्गज निवेशक, US Treasuries में बढ़ी हलचल

AI सेक्टर की चमक फीकी पड़ने के बाद अब बड़े निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले U.S. government bonds की तरफ रुख कर रहे हैं। 10-year Treasury yield घटकर **5.08%** पर आ गई है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट और भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ सकता है।

बाजार का बदलता रुख

निवेशकों का मूड बदल रहा है और अब वे हाई-रिस्क एसेट्स से दूरी बना रहे हैं। पिछले शुक्रवार तक, 10-year Treasury note की यील्ड में 17 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई और यह 5.08% के स्तर पर पहुंच गई। यह बदलाव संकेत दे रहा है कि गर्मी के दौरान जो पूंजी टेक्नोलॉजी सेक्टर में लगी थी, वह अब सरकारी बॉन्ड्स की सुरक्षा की ओर बढ़ रही है।

AI सेक्टर में भारी बिकवाली

AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। PHLX Semiconductor Index पिछले एक हफ्ते में 11% से ज्यादा गिर चुका है, जिससे यह पूरा सेक्टर 'बेयर मार्केट' (Bear Market) में दाखिल हो गया है। इसका असर क्रेडिट मार्केट पर भी दिख रहा है, जहां AI से जुड़ी कंपनियों के डेट पर ब्याज का स्प्रेड 360 बेसिस पॉइंट्स से अधिक बढ़ गया है। लेंडर्स अब इन कंपनियों को उधार देने में काफी सतर्कता बरत रहे हैं।

आर्थिक चुनौतियां बरकरार

बॉन्ड्स में आई तेजी के बावजूद, अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव कम नहीं हुआ है। महंगाई अभी भी ऊंची बनी हुई है और फिस्कल डेफिसिट 2021 के बाद के उच्चतम स्तर पर है। इसके अलावा, Brent crude की कीमतें $109 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जो आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं।

फेडरल रिजर्व और आगे की राह

Federal Reserve महंगाई को काबू में रखने के लिए अभी भी कड़ा रुख (Hawkish stance) अपनाए हुए है। मार्केट के जानकारों का मानना है कि साल के अंत तक बेंचमार्क ब्याज दरें 4% से 4.25% के दायरे में रह सकती हैं। अगर सरकार ने घाटे को कम करने के लिए कदम नहीं उठाए, तो 10-year note की यील्ड वापस 5.5% के स्तर पर जा सकती है, जिससे बॉन्ड की कीमतों पर दबाव और बढ़ेगा।

भारतीय निवेशकों के लिए संकेत

ग्लोबल मार्केट में यह 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) सेंटीमेंट भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब विदेशी पूंजी AI जैसे ग्रोथ सेक्टर से निकलती है, तो इसका असर लिक्विडिटी पर पड़ता है। निवेशकों को सलाह है कि वे टेक सेक्टर की इस वोलेटिलिटी पर नजर रखें, क्योंकि यही विदेशी संस्थागत निवेश (FII) और ग्लोबल रिस्क ऐपेटाइट को तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.