Netflix और Schneider Electric जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों ने भारत में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है। बढ़ती डिमांड और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के दम पर ये कंपनियां अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं, लेकिन बढ़ते कॉम्पिटिशन और लागत पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
भारत अब ग्लोबल कंपनियों के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि सप्लाई चेन और ऑपरेशंस का मुख्य केंद्र बन चुका है। साल 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों में यह साफ नजर आ रहा है कि डिजिटल एंटरटेनमेंट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, विदेशी कंपनियां भारत की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था का पूरा फायदा उठा रही हैं।
डिजिटल और कंज्यूमर सेक्टर की चमक
डिजिटल स्पेस में Netflix ने भारत में जबरदस्त पकड़ बनाई है। कंपनी के मुताबिक, भारत में 'व्यू आवर्स' में 24% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे रेवेन्यू में साल-दर-साल आधार पर 20% का उछाल आया। वहीं, प्रीमियम बेवरेज सेक्टर में भी कंपनियां 19% सेल्स ग्रोथ का दावा कर रही हैं, जो भारतीय ग्राहकों के 'प्रीमियम उत्पादों' की ओर बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।
इंडस्ट्रियल और ऑटो सेक्टर में तेजी
सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के चलते इंडस्ट्रियल सेक्टर में काफी हलचल है। Volvo Group ने बताया कि भारी कमर्शियल वाहनों की डिमांड बनी हुई है, जबकि Schneider Electric का कारोबार भारत में व्यापक स्तर पर फैल रहा है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में VinFast जैसे ग्लोबल नाम अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को तेजी से बढ़ा रहे हैं ताकि ऑपरेशनल एफिशिएंसी को सुधारा जा सके।
सप्लाई चेन और उभरते सेक्टर
स्वीडिश कंपनी AAK भारत के फार्मा सेक्टर को टारगेट करते हुए नई फैसिलिटीज में निवेश कर रही है। साथ ही, स्पेस टेक्नोलॉजी और डिफेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में Pixxel जैसी कंपनियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं।
हालांकि, सफलता का असली पैमाना यह होगा कि ये कंपनियां कितनी कुशलता से अपनी लागत को मैनेज करती हैं। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लोकल मार्केट की प्राइसिंग के बीच अपने मार्जिन को बरकरार रखना इन कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
