Global Drought Risk: सूखे का साया और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा, क्या 2027 तक बढ़ेगी महंगाई?

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
Global Drought Risk: सूखे का साया और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा, क्या 2027 तक बढ़ेगी महंगाई?

UNCCD की बैठक में सूखे से निपटने के वैश्विक फ्रेमवर्क पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। El Niño के 2027 की शुरुआत तक जारी रहने के अनुमान से ग्लोबल मार्केट में भारी नुकसान का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कमोडिटी प्राइसेस और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकते हैं।

आर्थिक मोर्चे पर बढ़ेगा दबाव

Mongolia में आयोजित UNCCD COP17 का अंत बिना किसी कानूनी रूप से बाध्यकारी (legally binding) समझौते के हुआ है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सूखे से उपजे आर्थिक जोखिमों को संभालने की जिम्मेदारी पूरी तरह से अलग-अलग देशों की सरकारों पर है। वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (World Meteorological Organization) के अनुसार, El Niño का असर फरवरी 2027 तक बने रहने की उम्मीद है, जो ग्लोबल कमोडिटी मार्केट्स में अनिश्चितता बढ़ा सकता है।

$1 ट्रिलियन के नुकसान का अंदेशा

Oxford Economics के अनुमानों के मुताबिक, सिर्फ 2027 में ही ग्लोबल इकोनॉमी को लगभग $986 बिलियन का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान सप्लाई चेन में बाधा, कृषि उत्पादकता में गिरावट और ऊर्जा की कीमतों में उछाल के कारण होगा। जब जल स्तर घटता है या फसलें खराब होती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है।

सेक्टर पर क्या होगा असर?

  • FMCG और एग्रोकेमिकल्स: इन सेक्टर्स के लिए कच्चा माल महंगा होने से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।
  • एनर्जी सेक्टर: हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर में कमी के कारण औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत बढ़ सकती है।
  • सॉवरेन रिस्क: कृषि निर्यात पर निर्भर रहने वाले देशों के कर्ज (debt) पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

निवेशकों को अब गेहूं, चीनी और खाद्य तेलों जैसे कमोडिटी प्राइस इंडेक्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। वाटर मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारों के खर्च का असर आने वाले समय में कंपनियों के मार्जिन को तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.