Global Bond Rout: US 10Y Yield पहुंचा **5.34%** पर, **2002** के बाद सबसे बड़ा उछाल

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Global Bond Rout: US 10Y Yield पहुंचा **5.34%** पर, **2002** के बाद सबसे बड़ा उछाल

ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में भारी गिरावट का दौर चल रहा है। US 10-Year Treasury Yield बढ़कर **5.34%** के स्तर को पार कर गया है, जो निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। इससे दुनिया भर में कर्ज लेना महंगा होता जा रहा है और भारतीय बाजार पर भी इसके असर की आहट सुनाई दे रही है।

ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट इस वक्त एक बड़े 'बॉन्ड राउट' (Bond Rout) से गुजर रहे हैं, जहां सॉवरेन बॉन्ड यील्ड्स उन ऊंचाइयों पर पहुंच गई हैं जो दशकों से नहीं देखी गई थीं। 5 अक्टूबर, 2026 तक, US 10-Year Treasury Yield 5.34% पर पहुंच गया है, जो 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। यही नहीं, यूके (UK) में 30-year gilt यील्ड्स 6% के स्तर को पार कर गई हैं, जो 1998 के बाद पहली बार हुआ है। यह बिकवाली इस बात का संकेत है कि दुनियाभर में 'पैसे की कीमत' (Price of Money) तेजी से बदल रही है।

अस्थिरता की मुख्य वजहें

इस संकट के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहली बड़ी वजह है लगातार बनी हुई महंगाई, जहां कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $90 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा, सरकारी राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficits) को पाटने के लिए भारी सरकारी खर्च और AI व डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी की जरूरत ने बाजार में सप्लाई और डिमांड का संतुलन बिगाड़ दिया है।

कंपनियों और निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?

सरकारी बॉन्ड यील्ड्स को बाकी सभी ब्याज दरों का 'बेंचमार्क' माना जाता है। जब ये यील्ड्स ऊपर जाती हैं, तो बैंकों से कर्ज लेना आम आदमी और कंपनियों, दोनों के लिए महंगा हो जाता है। भारत में भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है। भारतीय कंपनियां सितंबर 2026 में बॉन्ड जारी करने की होड़ में थीं, ताकि भविष्य में संभावित रेट हाइक से पहले सस्ते फंड लॉक किए जा सकें।

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'कॉर्पोरेट मार्जिन' है। जो कंपनियां भारी कर्ज (Debt) पर निर्भर हैं, उनका ब्याज खर्च (Interest Expense) उनके मुनाफे को खा सकता है। अब निवेशकों को बैलेंस शीट में Debt-to-Equity रेश्यो और Interest Coverage पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। आने वाले महीनों में आरबीआई (RBI) का रुख और सरकारी बॉन्ड व कॉर्पोरेट बॉन्ड के बीच का स्प्रेड (Spread) यह तय करेगा कि यह दबाव और बढ़ेगा या स्थिर होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.