ग्रीनपीस (Greenpeace) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की गर्मियों में पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने जर्मनी की इकोनॉमी को हिला दिया है। इससे देश को कम से कम **€36 अरब** का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिससे GDP में लगभग **1%** की कमी आई है।
जर्मनी में 2026 की गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और सूखे का असर अब आंकड़ों में साफ दिख रहा है। पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जलवायु संकट के कारण देश को €36 अरब का सीधा नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा जर्मनी की कुल इकोनॉमी का करीब 1% है, जो पिछले कुछ वर्षों में यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जलवायु-जनित झटका है।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर संकट
इस आर्थिक नुकसान का एक बड़ा हिस्सा राइन नदी (Rhine River) में ठप पड़ी शिपिंग से आया है। अत्यधिक गर्मी के कारण नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे माल ढोने वाली बजरी (barges) का चलना मुश्किल हो गया। इसका सीधा असर स्टील, केमिकल और पेट्रोलियम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा, जिससे कच्चे माल की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई और प्रोडक्शन में भारी देरी हुई।
नुकसान का वित्तीय ब्यौरा
आर्थिक नुकसान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- लेबर प्रोडक्टिविटी: गर्मी के कारण काम करने की क्षमता घटने और वर्किंग आवर्स के नुकसान से इकोनॉमी को €10.8 अरब का फटका लगा है।
- फॉरेस्ट डैमेज: जंगलों को हुए नुकसान का आकलन €7.5 अरब किया गया है।
- पब्लिक हेल्थ: गर्मी से जुड़ी बीमारियों के इलाज और हेल्थकेयर खर्च में €6.9 अरब की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- कृषि क्षेत्र: सूखे के कारण फसलें बर्बाद होने से €3.4 अरब का नुकसान हुआ है।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) की सरकार पर अब क्लाइमेट इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ा दबाव है। भविष्य में बिजली संयंत्रों (power plants) की कूलिंग और एनर्जी स्टेबिलिटी जैसे मुद्दे निवेशकों की नजर में रहेंगे। मार्केट अब यह ट्रैक कर रहा है कि क्या ये बार-बार होने वाले जलवायु व्यवधान जर्मन कंपनियों की सप्लाई चेन और लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल कॉस्ट को हमेशा के लिए बदलने पर मजबूर कर देंगे।
