ट्रेड डील और टैरिफ कटौती: तेज़ी का बड़ा कारण
वीकेंड पर आए एक ज्वाइंट स्टेटमेंट (Joint Statement) में इंडिया-यूएस ट्रेड डील की पुष्टि और अमेरिका द्वारा 25% के पेनाल्टी टैरिफ को वापस लेने के ऐलान ने शेयर बाज़ारों में जोश भर दिया। इस फैसले से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हुआ है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 50% तक से घटाकर करीब 18% कर दिया है। इस खबर के आते ही NSE Nifty50 में 2.8% का उछाल देखा गया। टैरिफ में यह कमी भारतीय एक्सपोर्ट्स (Exports) की कॉम्पिटिटिवनेस (Competitiveness) को बढ़ाएगी और सप्लाई चेन (Supply Chain) को चीन से हटाने में भारत के लिए नए मौके खोलेगी।
बाज़ार का वैल्यूएशन, ग्लोबल संकेत और मैक्रो फैक्टर्स
फिलहाल, Nifty50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 22.3 और BSE Sensex का 23.2 है। ये वैल्युएशन्स (Valuations) ऐतिहासिक औसत से कुछ ज़्यादा ज़रूर हैं, लेकिन कई एनालिस्ट्स (Analysts) इसे अभी भी रीज़नेबल (Reasonable) मानते हैं, खासकर कुछ ग्लोबल टेक कंपनियों की तुलना में। उदाहरण के लिए, NVIDIA (NVDA) का P/E रेश्यो लगभग 45.92, AMD का 78.07 और Intel का P/E रेश्यो नेगेटिव (-617.70) है।
ग्लोबल सेमीकंडक्टर (Semiconductor) इंडस्ट्री में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जिसके 2026 तक $975 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। यह ग्रोथ मुख्य रूप से हाई-वैल्यू AI चिप्स से आ रही है, जबकि ऑटो और स्मार्टफोन चिप्स की ग्रोथ धीमी है।
एशियाई बाज़ार भी सकारात्मक रहे, और वॉल स्ट्रीट (Wall Street) में भी बढ़त दर्ज की गई, जिसमें सेमीकंडक्टर कंपनियों जैसे NVIDIA का योगदान रहा। हालांकि, Amazon के AI स्पेंडिंग (Spending) पर बढ़ी हुई लागत की चेतावनी ने कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट पर निवेशकों के फोकस को उजागर किया है। डॉलर के कमजोर होने से सोना और चांदी की कीमतों में भी तेज़ी जारी रही। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (US Federal Reserve) से उम्मीद है कि वह 2026 की शुरुआत में इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) 3.5% से 3.75% के बीच रखेगा।
ऐतिहासिक रूप से, भारतीय बाज़ारों ने अमेरिकी टैरिफ के प्रति मज़बूती दिखाई है। हालांकि, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया एक्सपोर्टर्स (जैसे IT, फार्मा) के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इंपोर्ट (Import) महंगा कर सकता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और इंटरेस्ट रेट्स पर दबाव आ सकता है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि नज़दीकी अवधि में बाज़ार में कंसॉलिडेशन (Consolidation) देखने को मिल सकता है, और स्टॉक-स्पेसिफिक (Stock-specific) मूवमेंट्स अर्निंग्स (Earnings) पर निर्भर करेंगे। भारत के लिए 2025/26 फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान 13-16% के बीच है।
आगे का रास्ता
आगे चलकर, निवेशक कॉर्पोरेट अर्निंग्स रिपोर्ट्स पर बारीकी से नज़र रखेंगे। अमेरिकी लेबर मार्केट (Labor Market) के आंकड़े फेडरल रिज़र्व की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को प्रभावित करेंगे। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में AI चिप्स ग्रोथ को लीड कर रहे हैं, लेकिन बाकी सेगमेंट में धीमी गति दिख रही है। बाज़ार में रेंज-बाउंड (Range-bound) ट्रेडिंग की संभावना को देखते हुए, आगे चलकर स्टॉक-स्पेसिफिक मौकों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
