पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर **50.53 cm** तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर, सप्लाई चेन और कृषि पर गहरा संकट छाया हुआ है।
ऐतिहासिक जलस्तर से बढ़ा तनाव
शनिवार, 5 सितंबर 2026 को सुबह 10:00 बजे गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 cm दर्ज किया गया, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और पूरे बिहार में हो रही बेतहाशा बारिश के चलते हाइड्रोलोलॉजिकल अनुमान बताते हैं कि रविवार सुबह तक यह जलस्तर 50.62 cm तक जा सकता है, जो बाढ़ सुरक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती है।
इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट
बक्सर से भागलपुर तक फैली तटबंधों (embankments) की सुरक्षा खतरे में है। इस बाढ़ के कारण रोड और रेल ट्रांसपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ठप पड़ने का डर है। कृषि उत्पादकता पर इसका सीधा असर पड़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था दबाव में है। सरकारी संसाधनों का बड़ा हिस्सा अब राहत और बचाव कार्यों में खर्च होगा, जिसका असर आने वाले समय में सरकारी बजट और खर्चों पर दिखेगा।
सहायक नदियों का भी बढ़ा प्रकोप
स्थिति सिर्फ गंगा तक सीमित नहीं है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा जैसी प्रमुख नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई नदियों के एक साथ उफान पर होने से ड्रेनेज नेटवर्क पर भारी बोझ है और शहरी इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है।
प्रशासन की सक्रियता
राज्य प्रशासन ने हवाई सर्वेक्षण के जरिए स्थिति की निगरानी तेज कर दी है। जिलाधिकारियों को विस्थापित परिवारों को राहत पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। निवेशकों के लिए अब जलस्तर घटने की गति और इंफ्रास्ट्रक्चर की बहाली का समय सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर है, जिस पर आगे की आर्थिक गतिविधियों की दिशा निर्भर करेगी।
