बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी इंजन डैमेज का एक भी सबूत पेश करे। गडकरी ने बताया कि 2022 से अब तक **24 करोड़** गाड़ियां इस फ्यूल का इस्तेमाल कर चुकी हैं और इससे किसानों की जेब में **₹45,000 करोड़** अतिरिक्त आए हैं।
बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से इंजन खराब होने की चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अगर इसमें कोई तकनीकी कमी होती, तो अब तक देशभर में लाखों शिकायतें सामने आ चुकी होतीं। उन्होंने चुनौती दी कि कोई भी एक ऐसा मामला प्रमाणित करे जहां इथेनॉल की वजह से इंजन को नुकसान पहुंचा हो।
आंकड़ों से दी मजबूती
मंत्री के अनुसार, 2022 से अब तक करीब 4 करोड़ फोर-व्हीलर और 20 करोड़ टू-व्हीलर इथेनॉल मिक्स फ्यूल पर चल रहे हैं। सरकार का कहना है कि प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने 100% इथेनॉल ब्लेंड पर भी गाड़ियों की सफल टेस्टिंग की है, जो इसकी तकनीकी सुरक्षा साबित करती है।
किसानों की कमाई और इकोनॉमी पर असर
यह नीति केवल फ्यूल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कृषि विविधीकरण (Agricultural Diversification) से जोड़ा गया है। मक्का जैसी फसलों के उपयोग से बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों ने ₹45,000 करोड़ की अतिरिक्त कमाई की है। सरकार का मुख्य लक्ष्य भारत के भारी-भरकम ₹22 लाख करोड़ के फॉसिल फ्यूल इम्पोर्ट बिल को कम करना है।
निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि सरकार इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह सफल बता रही है, लेकिन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि पुराने वाहनों के कुछ हिस्सों को लेकर लंबे समय के प्रभाव पर नजर रखना जरूरी है। अब सरकार चावल के पुआल से एविएशन फ्यूल बनाने जैसे नए प्रयोगों पर भी ध्यान दे रही है, जिस पर आने वाले समय में इन्फ्रास्ट्रक्चर स्केलिंग का असर देखने को मिलेगा।
