हालांकि सरकारी आंकड़ों में GST कलेक्शन में **9%** की बढ़त दिख रही है, लेकिन अकाउंटिंग एडजस्टमेंट के बाद असल तस्वीर चिंताजनक है। घरेलू टैक्स कलेक्शन में **6%** की गिरावट आई है, जो देश में कम होती कंजम्पशन (Consumption) की ओर इशारा कर रही है।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में GST कलेक्शन ने ₹8.9 ट्रिलियन का आंकड़ा छुआ है। पहली नज़र में 9% की ग्रोथ शानदार लगती है, लेकिन अगर हम इसमें से अकाउंटिंग बदलावों को हटा दें, तो यह ग्रोथ घटकर महज 1.3% रह जाती है।
घरेलू खपत में सुस्ती का खतरा
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि घरेलू GST कलेक्शन में 6% की गिरावट दर्ज की गई है। यह सीधे तौर पर बताता है कि देश की इकॉनमी में लोकल डिमांड धीमी पड़ रही है। कुल कलेक्शन को सहारा देने वाला मुख्य कारण इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty) है, जिसमें 30.4% की बड़ी उछाल आई है। यह तेजी स्थानीय बिजनेस की वजह से नहीं, बल्कि ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का नतीजा है।
निवेशकों के लिए जोखिम
- सब्सिडी का बोझ: सरकार का सब्सिडी बिल 37% बढ़ गया है, जिससे 4.3% के फिस्कल डेफिसिट टारगेट पर दबाव है।
- कॉर्पोरेट और पर्सनल टैक्स: कॉर्पोरेट और पर्सनल इनकम टैक्स की ग्रोथ घटकर 5.8% रह गई है। कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर इनपुट कॉस्ट का दबाव बढ़ रहा है।
निवेशकों को अब कंज्यूमर गुड्स और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि घरेलू खपत में कमजोरी सीधे तौर पर इनके अर्निंग ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, Reserve Bank of India का रुख भी अहम होगा; अगर महंगाई बनी रहती है, तो ऊंची ब्याज दरें विकास को और धीमा कर सकती हैं।
