GST दरों में कटौती से ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बहार आई थी, लेकिन अब बढ़ती इनपुट कॉस्ट और ग्लोबल टेंशन ने मुनाफे पर दबाव बना दिया है। FMCG कंपनियों की राह भी आसान नहीं दिख रही।
ऑटो सेक्टर: रिकॉर्ड बिक्री लेकिन बढ़ती चुनौती
फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए शानदार रही। अप्रैल से जून के बीच पैसेंजर व्हीकल डिस्पैच का आंकड़ा 1.27 मिलियन यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 25.9% की भारी ग्रोथ है। कम टैक्स और आसान फाइनेंसिंग ने लोगों को टू-व्हीलर से फोर-व्हीलर की ओर शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन का संकट
इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में प्रीमियम स्मार्ट टीवी की डिमांड बढ़ी है, खासकर 32 इंच से बड़े टीवी पर GST 28% से घटाकर 18% किए जाने के बाद। मार्च 2026 तिमाही में 55 इंच से बड़े टीवी की हिस्सेदारी कुल शिपमेंट का करीब एक-तिहाई रही। हालांकि, वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके चलते अप्रैल-जून तिमाही में टीवी शिपमेंट में 9.8% की गिरावट दर्ज की गई है।
FMCG कंपनियों पर दबाव
हिन्दुस्तान यूनिलीवर, मैरिको, डाबर और नेस्ले इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों ने टैक्स कटौती का फायदा तो उठाया, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। नेस्ले इंडिया ने 2025 की अंतिम तिमाही में पिछले 5 सालों में सबसे अच्छी वॉल्यूम ग्रोथ दिखाई थी। फिलहाल, सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें और नए एनर्जी-एफिशिएंसी स्टैंडर्ड्स के अनुपालन का खर्च कंपनियों के मार्जिन को खा रहा है।
निवेशकों के लिए बड़ी सीख
अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी? यदि कीमतें बढ़ती हैं, तो मांग में कमी आने का बड़ा रिस्क है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां वॉल्यूम ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन के बीच कैसे संतुलन बनाती हैं।
