57वीं GST Council बैठक में नियमों को सरल बनाने पर फोकस रहा। सरकार ने प्रोसिक्यूशन थ्रेशोल्ड को बढ़ाकर **₹5 करोड़** कर दिया है, लेकिन EV ऑपरेटरों के लिए टैक्स दरों में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं GST Council की बैठक का मुख्य उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाना था। बैठक में सबसे बड़ा फैसला प्रोसीजरल रिफॉर्म्स को लेकर लिया गया, जिसमें टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों को हटाने और प्रोसिक्यूशन थ्रेशोल्ड को 5 गुना बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का बड़ा ऐलान किया गया है। यह कदम बिजनेस करने की प्रक्रिया को आसान बनाने और अनुपालन बोझ (compliance burden) को कम करने के लिए उठाया गया है।
EV टैक्स का पेंच
इंडस्ट्री के जानकारों और फ्लीट ऑपरेटर्स को उम्मीद थी कि इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट के लिए टैक्स दरों में कोई राहत मिल सकती है। चर्चा थी कि 5% GST रेट (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना) और 18% GST रेट (पूरे इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ) के बीच संतुलन बनाने पर सरकार कोई फैसला ले सकती है, लेकिन फिलहाल इसे कोई औपचारिक पॉलिसी शिफ्ट नहीं मिला है।
इलेक्ट्रिक फ्लीट चलाने वाली कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि उन्हें कम टैक्स रेट के मुकाबले इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का नुकसान उठाना पड़ता है। हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर करने वाली कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर इसका सीधा असर पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह समझना होगा कि EV रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अभी भी विकसित हो रहा है। राहत की बात यह है कि काउंसिल ने भविष्य में GST दरों में बदलाव को साल में केवल एक बार करने का निर्णय लिया है। इससे बिजनेस को भविष्य की प्लानिंग करने में अधिक स्थिरता और प्रेडिक्टिबिलिटी मिलेगी। अगले दौर की बैठकों में EV फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए ITC पात्रता पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
