GST Council की आगामी **7 अक्टूबर, 2026** को होने वाली बैठक में सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर मिलने वाली IGST छूट को हटाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य टैक्स नियमों में एकरूपता लाना और फॉरेन करेंसी की निकासी पर नियंत्रण करना है।
टैक्स छूट हटने से क्या बदलेगा?
साल 2017 से बैंकों और सरकार द्वारा नामित एजेंसियों को सोना, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर 3% IGST से छूट मिली हुई है, जबकि अन्य बाजार प्रतिभागियों को यह टैक्स चुकाना पड़ता है। अगर GST काउंसिल इस छूट को वापस लेने का फैसला करती है, तो इससे आयात की पूरी लागत संरचना (Cost Structure) बदल जाएगी।
इस फैसले की पीछे की वजह क्या है?
सरकार का मुख्य उद्देश्य बैंकों और निजी बुलियन एक्सचेंजों के बीच एक 'लेवल प्लेइंग फील्ड' तैयार करना है। साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को संरक्षित करना भी एक बड़ी प्राथमिकता है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच केवल सोने का आयात ही लगभग $17.47 बिलियन तक पहुंच गया है, जिसे देखते हुए सरकार ट्रेड बैलेंस को मैनेज करने के सख्त कदम उठा रही है।
निवेशकों और ज्वेलरी सेक्टर पर असर
यदि बैंकों को अब 3% IGST का भुगतान पहले करना पड़ा, तो इससे उनके वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ेगा। इसका सीधा असर ज्वेलरी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है, जिससे गहनों की खरीद लागत (Procurement Cost) में बढ़ोतरी की संभावना है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से अस्थाई रूप से सप्लाई में दिक्कत आ सकती है, जैसा कि 2026 की शुरुआत में नीतिगत बदलावों के दौरान देखा गया था। निवेशकों को 7 अक्टूबर की बैठक के नतीजों पर नजर रखनी होगी कि क्या सरकार कोई रियायती समय (Grace Period) देती है या इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाता है।
