स्मार्टफोन की सुस्त मांग को देखते हुए GST Council मोबाइल फोन पर टैक्स कम करने पर विचार कर रही है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि सरकार कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन की जांच (Audit) भी कर सकती है।
फिलहाल मोबाइल फोन पर 18% की दर से GST लगता है, जिसे कम करने को लेकर सरकार गंभीर है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के आंकड़ों में शिपमेंट में 11% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मांग को दोबारा रफ्तार देने के लिए सरकार इस फैसले पर विचार कर रही है, क्योंकि बढ़ती कीमतों ने आम ग्राहकों को स्मार्टफोन खरीदने से रोक दिया है।\n\nबाजार की स्थिति काफी मिली-जुली है। जहां बजट और मास-मार्केट सेगमेंट में मेमोरी चिप्स जैसी महंगी कॉम्पोनेंट लागत के कारण सुस्ती है, वहीं ₹25,000 से महंगे प्रीमियम सेगमेंट ने 54% की शानदार ग्रोथ दिखाई है।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\nसरकार सिर्फ टैक्स घटाने पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी पर भी नजर रख रही है। GST काउंसिल यह ऑडिट करने की तैयारी में है कि कंपनियों ने पहले मिली टैक्स राहत का फायदा ग्राहकों को दिया या उसे अपने मुनाफे (Profit Margin) में जोड़ लिया। यदि सरकार ने टैक्स कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को देने का सख्त निर्देश दिया, तो मैन्युफैक्चरर्स के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।\n\nफिलहाल पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर रिकॉर्ड हाई सेलिंग प्राइस और अनसोल्ड इन्वेंट्री के रिस्क से जूझ रहा है। अगर आने वाले फेस्टिव सीजन में उम्मीद के मुताबिक बिक्री नहीं होती है, तो कंपनियों को भारी डिस्काउंट देने पड़ेंगे, जिससे उनका मुनाफा और भी कम हो सकता है।
