8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। काउंसिल ने अब बीज के स्टोरेज और कॉफी क्यूरिंग सेवाओं को GST के दायरे से बाहर रखने की मंजूरी दे दी है, जिससे एग्री-सप्लाई चेन की लागत में कमी आएगी।
एग्री-सेक्टर में बड़ी राहत
8 अक्टूबर 2026 को आयोजित 57वीं GST काउंसिल की बैठक में कृषि क्षेत्र के लिए नीतिगत बदलावों का ऐलान किया गया है। काउंसिल ने बुवाई के लिए उपयोग होने वाले बीजों के स्टोरेज और वेयरहाउसिंग के साथ-साथ किसानों को दी जाने वाली कॉफी क्यूरिंग सेवाओं को GST से पूरी तरह छूट देने की सिफारिश की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कृषि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रही जटिलताओं को कम करना और ऑपरेशनल खर्चों को घटाना है।
लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशन पर असर
बीजों के स्टोरेज पर टैक्स स्पष्टता न होने के कारण पहले कई तरह के विवाद देखने को मिलते थे। अब बीजों की परिभाषा को कृषि मानदंडों के अनुरूप करने से मार्केट पार्टिसिपेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी। इसी तरह, कॉफी क्यूरिंग सेवाओं को टैक्स फ्री करने से कॉफी उत्पादकों के लिए परिचालन खर्च (Operational Expenses) कम होंगे, जो लंबे समय से इस टैक्स स्टेटस को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।
नियमों में अन्य बड़े बदलाव
काउंसिल ने केवल सेक्टर-स्पेसिफिक राहत ही नहीं दी, बल्कि बिजनेस करने में आसानी (Ease of Doing Business) के लिए बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स का भी ऐलान किया है। GST संबंधी अपराधों के लिए अब अभियोजन की सीमा (Prosecution Threshold) को बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा, GST अधिकारियों के पास मौजूद गिरफ्तारी की कुछ शक्तियों को भी वापस ले लिया गया है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों और कंपनियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये फिलहाल काउंसिल की सिफारिशें हैं। इनका व्यावहारिक लाभ तब मिलेगा जब वित्त मंत्रालय और राज्य सरकारें आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी करेंगी। इसके बाद वेयरहाउसिंग और एग्री-लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अपने अकाउंटिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्रोसेस को इन नए नियमों के अनुरूप अपडेट करना होगा।
