GST Council की 57वीं बैठक में कृषि क्षेत्र के लिए बड़े बदलाव किए गए हैं। अब सीड स्टोरेज, कॉफी प्रोसेसिंग और इसबगोल पर टैक्स में छूट दी गई है, साथ ही ट्रैक्टर के री-ट्रेडेड टायरों पर GST घटाकर **5%** कर दिया गया है।
कृषि सेवाओं के लिए टैक्स नियमों में स्पष्टता
GST काउंसिल ने अपनी 57वीं बैठक में एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने का काम किया है। अब तक सीड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग को लेकर जो कन्फ्यूजन था, उसे पूरी तरह दूर कर दिया गया है। बुवाई के लिए इस्तेमाल होने वाले बीजों की ग्रेडिंग और केमिकल ट्रीटमेंट जैसी सेवाओं को अब टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर (Exempt) कर दिया गया है। इसी तरह कॉफी उत्पादकों को भी राहत मिली है, जहां क्योरिंग, हलिंग और सॉर्टिंग जैसी सेवाओं को छूट दी गई है।
इसबगोल पर जीरो GST
फार्मा और फूड इंग्रीडिएंट सेक्टर के लिए भी एक बड़ी राहत है। इसबगोल (Psyllium seeds) पर अब 0% यानी 'निल' GST रेट तय किया गया है। इससे सालों से चल रहा कानूनी विवाद खत्म हो गया है और कारोबारियों के लिए कंप्लायंस का बोझ कम होगा।
किसानों की जेब पर असर
सरकार ने री-ट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर GST घटाकर 5% कर दिया है। इसे नए टायरों के टैक्स रेट के बराबर लाने से किसानों के लिए उपकरणों का मेंटेनेंस सस्ता हो जाएगा। यह कदम रूरल इकॉनमी में ऑपरेशनल खर्चों को कम करने की एक कोशिश है।
निवेशकों के लिए टेकअवे
हालांकि यह कोई बड़ा मैक्रो-इकोनॉमिक स्टिमुलस नहीं है, लेकिन सप्लाई चेन में फ्रिक्शन कम होने से रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को फायदा हो सकता है। निवेशक अब यह देख सकते हैं कि इन सुधारों से इन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में आने वाले समय में कितना सुधार आता है, क्योंकि लीगल और कंप्लायंस लागत में कमी से उनका कैश फ्लो बेहतर होगा।
