57वीं GST Council की बैठक में बड़े सुधारों का ऐलान किया गया है। अब नवंबर 2026 से कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और एक्सपोर्ट बेनेफिट्स का सीधा फायदा मिलेगा, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और IT सेक्टर का फंसा हुआ पैसा बाहर आएगा।
वर्किंग कैपिटल की बाधाएं होंगी दूर
GST काउंसिल ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की पात्रता का दायरा बढ़ा दिया है। अब 1 नवंबर, 2026 से इनपुट सर्विसेज और 1 अप्रैल, 2027 से कैपिटल गुड्स पर रिफंड का रास्ता साफ हो गया है। FMCG, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर, जहां बड़ी पूंजी टैक्स भुगतान में फंस जाती थी, उन्हें अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, CGST एक्ट की धारा 17(5) में संशोधन कर कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा और एक्सपायरी के कारण राइट-ऑफ किए गए माल पर भी टैक्स क्रेडिट की सुविधा दी गई है।
एक्सपोर्ट और सर्विस सेक्टर के लिए बूस्टर डोज़
इंडियन IT और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए बड़ी खबर यह है कि विदेशी हेड ऑफिस और ब्रांच को दी जाने वाली सेवाओं को अब एक्सपोर्ट के तौर पर माना जाएगा। इससे कंपनियों को जीरो-रेटिंग बेनेफिट्स मिलेंगे, जिससे उन्हें इंटीग्रेटेड GST भुगतान करने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
कानूनी तनाव में कटौती
सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देते हुए GST के तहत प्रॉसिक्यूशन (मुकदमा) शुरू करने की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया है। जुर्माने में कटौती और फिजिकल इंस्पेक्शन में कमी लाने से कंपनियों के परिचालन लागत (Operational Cost) में भारी गिरावट आएगी।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ये फिलहाल पॉलिसी सिफारिशें हैं। जब तक सरकार आधिकारिक नोटिफिकेशन या सर्कुलर जारी नहीं करती, तब तक इन्हें कानून नहीं माना जा सकता। साथ ही, कैपिटल गुड्स पर टैक्स रिकवरी की प्रक्रिया 60 महीनों में चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी, इसलिए राहत का असर धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। कंपनियों को अपनी अकाउंटिंग और टैक्स-ट्रैकिंग सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत होगी ताकि बदलाव के दौरान कोई चूक न हो।
