GST Council 57th Meeting: हाईवे पर अब कम होगी सख्ती, Prosecution लिमिट बढ़कर हुई **₹5 करोड़**

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AuthorMehul Desai|Published at:
GST Council 57th Meeting: हाईवे पर अब कम होगी सख्ती, Prosecution लिमिट बढ़कर हुई **₹5 करोड़**

57वीं GST Council की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। अब हाईवे पर रैंडम वाहनों की जांच के लिए सीनियर ऑफिसर की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके साथ ही, Prosecution थ्रेशोल्ड को **₹1 करोड़** से बढ़ाकर **₹5 करोड़** कर दिया गया है, जो व्यापारियों के लिए बड़ी राहत है।

8 अक्टूबर 2026 को हुई GST Council की बैठक में बिजनेस करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए बड़े सुधारों का ऐलान किया गया है। अब हाईवे पर बिना सोचे-समझे वाहनों को रोकने की प्रथा पर लगाम लगेगी। नई गाइडलाइंस के अनुसार, केवल पुख्ता जानकारी (Specific Intelligence) होने पर ही वाहनों की चेकिंग की जाएगी और इसके लिए भी कम से कम जॉइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी।

लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

सरकार का मकसद है कि इंस्पेक्शन का ध्यान अब पूरे रास्ते के बजाय केवल माल के ओरिजिन और डेस्टिनेशन पॉइंट पर रहे। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों को बार-बार होने वाली देरी से छुटकारा मिलेगा और माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ेगी।

Penalties और Prosecution में बड़ी राहत

छोटे और मध्यम व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए काउंसिल ने प्रोसीक्यूशन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया है। इसके अलावा, सामान्य पेनल्टी को ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दिया गया है। साथ ही कुछ मामलों में गिरफ्तारी के प्रावधानों को भी हटाया गया है।

निवेशकों के लिए जरूरी बात

हालांकि ये फैसले बड़े सुधार की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इनका लाभ 1 अप्रैल 2027 से जमीनी स्तर पर दिखाई देगा। इन बदलावों को Central GST Act में शामिल करने के लिए विधायी संशोधन (Legislative Amendments) की जरूरत होगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि अलग-अलग राज्य इन नियमों को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, क्योंकि GST का कार्यान्वयन राज्यों की सहमति पर भी निर्भर करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.