सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच दस प्रमुख योजनाओं के कुल विज्ञापन बजट में से आधे से ज्यादा हिस्सा अकेले GST Bachat Utsav पर खर्च किया गया है। इस कैंपेन के लिए **₹27.1 करोड़** आवंटित किए गए, जो PM Internship Scheme के **₹12.6 करोड़** के मुकाबले काफी अधिक है।
वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान सार्वजनिक व्यय के आंकड़ों पर गौर करें तो सरकार का पूरा जोर 'GST Bachat Utsav' कैंपेन को प्रमोट करने पर रहा है। कुल ₹54.5 करोड़ के निर्धारित विज्ञापन बजट में से ₹27.1 करोड़ सिर्फ इसी एक पहल पर खर्च हुए। यह राशि मुख्य रूप से सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच चले 100-दिनों के उस कैंपेन में इस्तेमाल की गई, जिसका मकसद ग्राहकों को बदले हुए GST रेट्स की जानकारी देना था।
खर्च का गणित और प्राथमिकताएं
सरकारी खर्चों की लिस्ट में इसके बाद PM Internship Scheme का नंबर आता है, जिसे अक्टूबर 2024 से मार्च 2026 की अवधि के लिए ₹12.6 करोड़ मिले। वहीं, PM Vishwakarma Scheme को ₹7.4 करोड़ का फंड दिया गया। डेटा यह भी बताता है कि कई सरकारी स्कीम्स को विज्ञापन के लिए शून्य बजट मिला, जो विभाग की चुनिंदा रणनीति को दर्शाता है।
विज्ञापन के माध्यम (Media Mix)
इस प्रचार में प्रिंट मीडिया का दबदबा रहा, जिसने कुल खर्च का 58.8% हिस्सा हासिल किया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की हिस्सेदारी 19.5% रही, जबकि डिजिटल और आउटडोर विज्ञापनों पर क्रमशः 14.6% और 7.2% खर्च किए गए। इन सभी खर्चों का प्रबंधन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले 'Central Bureau of Communication' ने किया है।
आर्थिक नीति पर नजर रखने वालों के लिए यह खर्च एक बड़ा संकेत है कि सरकार टैक्स राहत के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने को कितनी अहमियत दे रही है।
