GST 2.0 का असर: राज्यों के खजाने पर बड़ा झटका, कहीं फायदा तो कहीं भारी नुकसान

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AuthorAditya Rao|Published at:
GST 2.0 का असर: राज्यों के खजाने पर बड़ा झटका, कहीं फायदा तो कहीं भारी नुकसान

GST 2.0 रिफॉर्म्स के एक साल पूरे हो गए हैं, लेकिन भारतीय राज्यों के लिए स्थिति काफी अलग है। जहां कुल रेवेन्यू में **10.5%** की ग्रोथ दिखी है, वहीं झारखंड और ओडिशा जैसे मिनरल-रिच राज्यों की कमाई में भारी गिरावट आई है।

रेवेन्यू डायनामिक्स में आया बड़ा बदलाव

सितंबर 2025 में GST 2.0 लागू होने के बाद भारत के फेडरल स्ट्रक्चर में एक नया मोड़ आया है। 2022 में कंपनसेशन का दौर खत्म होने के बाद, अब राज्य पूरी तरह से अपने दम पर टैक्स असर को झेल रहे हैं। अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच 10.5% की रेवेन्यू ग्रोथ ऊपर से तो ठीक दिखती है, लेकिन राज्यों के बीच फिस्कल हेल्थ में भारी अंतर है।

लोकल कलेक्शन से ज्यादा सेटलमेंट पर निर्भरता

अब राज्यों की कमाई लोकल कलेक्शन और IGST सेटलमेंट में बंट गई है। लोकल SGST ग्रोथ घटकर 5.2% रह गई है, जो पिछले साल 9.6% थी। वहीं, IGST सेटलमेंट 16.6% की रफ्तार से बढ़ा है। इसमें इंपोर्ट-रिलेटेड IGST में 27% की उछाल ने राज्य सरकारों की मुश्किल बढ़ा दी है, क्योंकि अब उनकी कमाई उनके अपने कंट्रोल से बाहर के फैक्टर्स पर ज्यादा निर्भर है।

कौन बना विनर और कौन लूजर?

हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों के लिए यह दौर काफी फायदेमंद रहा है। दूसरी ओर, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे औद्योगिक राज्यों को करीब ₹9,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। कोयले पर ₹400 प्रति टन का सेस हटने और टैक्स 18% होने के कारण इन राज्यों से पैसा IGST पूल में ज्यादा जा रहा है।

पारदर्शिता की दरकार

GST काउंसिल ने रिफॉर्म की अनुमानित लागत ₹48,000 करोड़ आंकी थी, लेकिन इसका असर राज्यों पर कैसे पड़ेगा, इसका कोई साफ ब्योरा नहीं दिया गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले काउंसिल को स्टेट-वाइज इम्पैक्ट और मंथली सेटलमेंट डेटा जारी करना चाहिए, ताकि राज्य अपनी आर्थिक स्थिति का सही अनुमान लगा सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.