7 अक्टूबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रहने के आसार हैं। GIFT Nifty ने गिरावट के संकेत दिए हैं। बाजार की नजरें पूरी तरह से RBI की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं, जहां **25 बेसिस पॉइंट्स** की ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका है। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और FIIs की बिकवाली भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारतीय इक्विटी बाजार बुधवार, 7 अक्टूबर, 2026 को सतर्कता के साथ कारोबार शुरू करने की तैयारी में है। GIFT Nifty के आंकड़े 54 से 125 अंकों तक की गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं। यह दबाव मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के आज आने वाले फैसलों को लेकर है।
RBI पॉलिसी और ब्याज दरों का असर
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह दर बढ़कर 5.50% तक पहुंच सकती है। ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर बैंकिंग, एनबीएफसी (NBFC), रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे कंपनियों की बरोइंग कॉस्ट (Borrowing Cost) बढ़ जाती है। निवेशकों की नजर अब RBI गवर्नर के बयान पर होगी, जिससे भविष्य में ब्याज दरों का रुख स्पष्ट हो सकेगा।
ग्लोबल दबाव और कच्चे तेल की चुनौतियां
एक तरफ जहां अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड स्तर पर हैं, वहीं एशियाई बाजार सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। घरेलू निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ब्रेंट क्रूड ऑयल है, जो $101 प्रति बैरल के पार बना हुआ है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भारतीय सूचकांकों पर बिक्री का दबाव बनाए रखा है।
मार्केट के लेवल्स पर नजर
तकनीकी तौर पर Nifty 50 के लिए 22,800 का स्तर एक बड़ी बाधा बना हुआ है। यदि बाजार में कमजोरी बनी रहती है, तो ट्रेडर्स को 22,600 और 22,400 के सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखनी होगी। बाजार की दिशा पूरी तरह से आज आने वाली पॉलिसी और उस पर निवेशकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
