GIFT Nifty सपाट शुरुआत का संकेत, RBI पॉलिसी पर टिकीं निवेशकों की निगाहें

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
GIFT Nifty सपाट शुरुआत का संकेत, RBI पॉलिसी पर टिकीं निवेशकों की निगाहें

भारतीय शेयर बाजार आज, 6 अगस्त 2026 को सपाट शुरुआत के लिए तैयार हैं, क्योंकि निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पॉलिसी फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं, जहां एशियाई इंडेक्स में गिरावट है वहीं अमेरिकी शेयरों में नरमी दिखी है। इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने विदेशी बिकवाली के बीच बाजार को सहारा देना जारी रखा है।

RBI के फैसले का इंतजार, बाजार में दिखी नरमी

आज, 6 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल धीमी रहने की उम्मीद है। GIFT Nifty के शुरुआती रुझान से पता चलता है कि आज कारोबार में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। यह सावधानी का माहौल इसलिए है क्योंकि निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों पर फैसले से बाजार की दिशा तय होगी।

ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेत

दुनिया भर के बाजारों से मिल रहे संकेत भी मिले-जुले हैं, जिससे आज कोई बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। एशियाई बाजार आज गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। ये गिरावट टेक्नोलॉजी शेयरों में आई पिछली तेजी के थमने का असर दिखा रही है। वहीं, अमेरिकी बाजारों का हाल भी मिला-जुला रहा। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज रिकॉर्ड स्तर पर तो पहुंचा, लेकिन टेक-हैवी Nasdaq Composite प्रमुख कंपनियों के नतीजों के दबाव में लाल निशान पर बंद हुआ। ऐसे में, निवेशक और स्पष्ट ट्रेंड का इंतजार करते हुए फिलहाल साइडलाइन हो सकते हैं।

घरेलू और विदेशी निवेशकों का खेल

बाजार के खिलाड़ी संस्थागत निवेशकों के बदलते रुख पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। 5 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी मार्केट से ₹943 करोड़ निकालकर बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,883 करोड़ की इक्विटी खरीदकर बाजार को सहारा दिया। घरेलू और विदेशी फंड फ्लो के बीच यह लगातार जारी खींचतान ट्रेडर्स के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है, क्योंकि यह बाजार की लिक्विडिटी और कीमतों की स्थिरता तय करती है।

कमोडिटी मार्केट और महंगाई का दबाव

इक्विटी इंडेक्स से परे, कमोडिटी मार्केट भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक गोल्ड की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोना सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें क्षेत्रीय स्थिरता और सप्लाई रूट पर संभावित प्रभाव को लेकर चल रही चर्चाओं से प्रभावित होकर गिर गई हैं।

आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात RBI की महंगाई और विकास दर पर टिप्पणी होगी, जो कर्ज की लागत और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्रभावित कर सकती है। ट्रेडर्स को यह भी देखना होगा कि विदेशी निवेशकों से संभावित बिकवाली के दबाव को घरेलू संस्थानों का समर्थन कितना प्रभावी ढंग से झेल पाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.