GIFT IFSC भारत का सबसे बड़ा फाइनेंशियल हब बनकर उभर रहा है। अब तक यहाँ से **$52.82 अरब** की राशि डिसबर्स की जा चुकी है, जो देश की **$10-15 ट्रिलियन** की इकोनॉमिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है।
GIFT IFSC तेजी से भारत के फाइनेंशियल लैंडस्केप का एक मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है। 31 अगस्त, 2026 तक, यहां काम कर रही 20 इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर बैंकिंग यूनिट्स (IBUs) ने $54.02 अरब की राशि को मंजूरी दी है, जिसमें से $52.82 अरब पहले ही बांटे जा चुके हैं। यह आंकड़ा ग्लोबल लिक्विडिटी और भारत की घरेलू विकास जरूरतों के बीच के अंतर को कम करने में हब की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
'विकसित भारत 2047' का रोडमैप
भारत का 'विकसित भारत 2047' विजन पूरा करने के लिए लगभग $10 से $15 ट्रिलियन की फंडिंग की जरूरत है, जिसे सिर्फ घरेलू मार्केट के जरिए जुटाना मुश्किल है। GIFT IFSC एक टैक्स-एफिशिएंट प्लेटफॉर्म के रूप में विदेशी निवेशकों को भारत के विकास में पैसा लगाने का एक शानदार जरिया दे रहा है।
बैंकिंग के अलावा कहां बढ़ रहा है जोर?
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच, इस सेंटर ने $11.62 अरब के एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और $11.12 अरब की बॉन्ड लिस्टिंग को फैसिलिटेट किया है। बजट 2026-27 में टैक्स हॉलिडे को बढ़ाकर 20 साल करने के फैसले ने भी इन्वेस्टर्स का भरोसा काफी बढ़ाया है।
क्या हैं चुनौतियां और जोखिम?
तेजी से बढ़ते इस सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो को मैनेज करना और RBI की घरेलू नीतियों के साथ तालमेल बिठाना एक कठिन काम है। इसके अलावा, ग्लोबल लिक्विडिटी, इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) नियमों का कड़ाई से पालन करना भी लॉन्ग-टर्म सफलता के लिए बेहद जरूरी है। भविष्य में इस हब का लक्ष्य सिर्फ भारत के लिए फंड जुटाना नहीं, बल्कि एक न्यूट्रल ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर बनना है।
