GIFT City के फाइनेंशियल हब ने **$120 बिलियन** की बैंकिंग एसेट्स का बड़ा आंकड़ा छू लिया है। टैक्स बेनेफिट्स के चलते कंपनियां तो आ गईं, लेकिन अब असली चुनौती बेहतर सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर और डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल तैयार करने की है, ताकि टॉप टैलेंट यहां टिक सके।
टैक्स हब से लिविंग हब तक का सफर
International Financial Services Centres Authority (IFSCA) के कुशल मार्गदर्शन में, GIFT City ने एक स्टेबल रेगुलेटरी और टैक्स-फ्रेंडली एनवायरनमेंट तैयार किया है। 2030 तक 'सेक्शन 9A' के टैक्स बेनेफिट्स का विस्तार होने से ग्लोबल एसेट मैनेजर्स के लिए यह एक पसंदीदा ठिकाना बन गया है। हालांकि, बिजनेस के मोर्चे पर मिली इस सफलता के बावजूद, रेजिडेंशियल लाइफ के मामले में शहर अभी पीछे है। अभी यहां रोजाना काम करने वाले लोगों की संख्या करीब 25,000 है, लेकिन रेजिडेंशियल आबादी 2,000 से भी कम है।
यह असंतुलन एक बड़ा रिस्क है। किसी भी बड़े फाइनेंशियल हब में काम करने वाले प्रोफेशनल केवल सैलरी नहीं, बल्कि अच्छी एजुकेशन, हेल्थकेयर और एंटरटेनमेंट जैसी सुविधाएं भी चाहते हैं। इन सुविधाओं के अभाव में कंपनियों के लिए टैलेंट को रिटेन करना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स का विस्तार जरूरी
फिलहाल, GIFT City का वॉल्यूम मुख्य रूप से GIFT Nifty 50 डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स पर टिका हुआ है। लिक्विडिटी के लिए यह अच्छा है, लेकिन भविष्य की मजबूती के लिए पोर्टफोलियो में विविधता लाना जरूरी है। भविष्य में IPO लिस्टिंग और ब्रॉड कैपिटल मार्केट सर्विसेज पर जोर देने से ही यह शहर मुंबई जैसे बड़े फाइनेंशियल सेंटर्स को टक्कर दे पाएगा। अब आने वाले समय में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर और नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग ही यह तय करेगी कि GIFT City एक इंटीग्रेटेड ग्लोबल हब बन पाएगा या नहीं।
