India Tech Jobs: पारंपरिक IT कंपनियों को पछाड़कर GCC का बढ़ा दबदबा, हायरिंग में बड़ा बदलाव

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
India Tech Jobs: पारंपरिक IT कंपनियों को पछाड़कर GCC का बढ़ा दबदबा, हायरिंग में बड़ा बदलाव

भारत में अब ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) नौकरियों का नया हब बन गए हैं। पिछले साल GCCs ने **2,00,000** नेट नौकरियां जोड़ीं, जो पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों से कहीं ज्यादा हैं। AI और क्लाउड जैसे हाई-वैल्यू रोल्स की बढ़ती मांग निवेशकों के लिए चिंता और अवसर दोनों पैदा कर रही है।

हायरिंग का नया 'पावरहाउस'

भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में, मल्टीनेशनल कंपनियों के इनोवेशन हब यानी GCCs ने लगभग 2,00,000 नए कर्मचारियों को काम पर रखा। इसकी तुलना में पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों ने सिर्फ 1,10,000 नौकरियां ही पैदा कीं। यह उस दौर के खत्म होने का संकेत है, जहां केवल IT सर्विस कंपनियां ही रोजगार का मुख्य जरिया हुआ करती थीं।

क्यों बदल रहा है ट्रेंड?

साल 2026 तक, भारत में 2,100 से ज्यादा GCC यूनिट्स सक्रिय हैं, जिनमें 23 लाख (2.3 मिलियन) से अधिक प्रोफेशनल काम कर रहे हैं। इनका पूरा फोकस अब प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनरेटिव AI, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी पर है। ये कंपनियां अब 'वॉल्यूम' के बजाय 'स्पेशलाइज्ड स्किल्स' पर जोर दे रही हैं।

वेतन (Salary) की जंग और मार्जिन पर दबाव

वेतन के आंकड़ों में भी भारी अंतर दिख रहा है। GCCs में सैलरी बढ़ोतरी 9.3% से 10.4% के बीच रहने का अनुमान है, जबकि पारंपरिक IT कंपनियों में यह औसत केवल 6.6% के करीब है। यह अंतर साफ बताता है कि AI और क्लाउड जैसे स्पेशलाइज्ड टैलेंट के लिए मार्केट में कितनी तगड़ी खींचतान है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि GCCs में 52% कंपनियां जहां अपनी टीम बढ़ा रही हैं, वहीं 26% सेंटर्स अभी रिस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) के दौर से गुजर रहे हैं। कंपनियां ऑटोमेशन के जरिए पुराने और रूटीन कामों को कम कर रही हैं। यह 'टैलेंट वॉर' और बढ़ती सैलरी का दबाव पारंपरिक IT कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि IT कंपनियां अपने रिक्रूटमेंट और मार्जिन को बचाने के लिए क्या नई रणनीति अपनाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.