GCCs का CSR पर बड़ा दांव: खर्च बढ़ाकर ₹3,661 करोड़ हुआ, एजुकेशन सेक्टर पर खास नजर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GCCs का CSR पर बड़ा दांव: खर्च बढ़ाकर ₹3,661 करोड़ हुआ, एजुकेशन सेक्टर पर खास नजर

भारत में मौजूद Global Capability Centres (GCCs) ने वित्त वर्ष 2025 में CSR पर जमकर खर्च किया है। पिछले एक दशक में यह आंकड़ा **6.4 गुना** बढ़कर **₹3,661 करोड़** तक पहुंच गया है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अभी भी केवल टियर-1 शहरों तक ही सीमित है।

तेजी से बढ़ता CSR दायरा

Sattva Consulting और India Data Insights के आंकड़ों के अनुसार, भारत में GCCs का सोशल इन्वेस्टमेंट तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 10 सालों में यह 20.4% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से आगे बढ़ा है, जो देश की सामान्य कॉर्पोरेट फिलैंथ्रॉपी की 15% की दर से कहीं अधिक है।

एजुकेशन पर क्यों है जोर?

GCCs के लिए CSR केवल दान नहीं, बल्कि बिजनेस की जरूरत है। वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच, कुल खर्च का 34% से 52% हिस्सा एजुकेशन पर खर्च किया गया। डिजिटल स्किल्स और कैपेसिटी बिल्डिंग के जरिए ये कंपनियां अपनी टेक और इंजीनियरिंग की जरूरतों के हिसाब से भविष्य का 'टैलेंट पाइपलाइन' तैयार कर रही हैं।

इनोवेशन और भौगोलिक असमानता

हालांकि निवेश का आंकड़ा बड़ा है, लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं:

  • इन्नोवेशन की कमी: कुल खर्च का सिर्फ 4% यानी ₹435 करोड़ ही इन्नोवेशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च हुआ। जानकारों का मानना है कि GCCs की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का इस्तेमाल सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में बेहतर तरीके से हो सकता था।
  • शहरों तक सीमित: CSR फंड का 65% से ज्यादा हिस्सा बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली NCR, मुंबई और हैदराबाद जैसे टियर-1 शहरों में ही खर्च हो रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों की अनदेखी से इसका सामाजिक प्रभाव सीमित रह गया है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.