पेट्रोल पंप डीलर अब UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाली संभावित फीस का कड़ा विरोध कर रहे हैं। डीलर्स का कहना है कि पहले ही उनके मार्जिन बेहद कम हैं और बढ़ती परिचालन लागत के चलते बिजनेस को संभालना मुश्किल हो गया है।
UPI फीस से मचा हड़कंप
United Petroleum Dealers Association ने पेट्रोल पंपों पर UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के किसी भी प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। डीलर्स का तर्क है कि डिजिटल पेमेंट पर प्रोसेसिंग फीस थोपे जाने से उनके रिटेल आउटलेट्स चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा हो जाएगा।
क्यों दबाव में है बिजनेस?
डीलर इस बात से परेशान हैं कि बीते 9 वर्षों में लेबर, बिजली और नियमों के पालन का खर्च कई गुना बढ़ गया है, लेकिन उनके कमीशन में केवल 30 पैसे प्रति लीटर की ही बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, सरकार के E20 फ्यूल (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल) के अनिवार्य नियम ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस फ्यूल को हैंडल करने के लिए स्टोरेज टैंक और डिस्पेंसिंग मशीनों को अपग्रेड करने का खर्च बहुत अधिक है, जिससे डीलर्स की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
क्या है मार्केट का हाल?
देश भर में पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ने से मार्केट सैचुरेशन की स्थिति बन गई है, जिससे बिक्री की वॉल्यूम बंट गई है। डीलर अब अपनी घटती कमाई और बढ़ते खर्चों के बीच अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?
यह स्थिति सीधे तौर पर Indian Oil Corporation (IOCL), Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) और Bharat Petroleum Corporation (BPCL) जैसी सरकारी ऑयल कंपनियों के लिए चिंता का विषय है। अगर डीलर्स का आर्थिक संकट गहराता है, तो फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर असर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्या सरकार UPI फीस पर कोई ठोस फैसला लेती है या फिर इन कंपनियों के कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाता है।
