फ्रांस की सरकारी बॉन्ड यील्ड **2002** के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। बढ़ते कर्ज और बजट घाटे के कारण निवेशक डरे हुए हैं। देश में खर्चों में कटौती को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध 'फिस्कल डूम लूप' (fiscal doom loop) के खतरे को बढ़ा रहा है, जिसका सीधा असर यूरोप की इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर पड़ सकता है।
बॉन्ड मार्केट में बढ़ता तनाव
फ्रांस के लिए फिलहाल हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5% के स्तर के करीब पहुंचना इस बात का संकेत है कि निवेशक अब फ्रांस के सरकारी डेट (debt) को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। बाजार में यह घबराहट देश की खराब फिस्कल हेल्थ को दर्शाती है।
कर्ज और घाटे का गणित
आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2026 तक फ्रांस का पब्लिक डेट जीडीपी (GDP) का 120% तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का बजट घाटा जीडीपी के 5.4% पर है, जो यूरोपियन यूनियन की 3% की तय सीमा से कहीं ज्यादा है। इस स्थिति ने सरकार को एक बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।
'फिस्कल डूम लूप' का डर
प्रधानमंत्री Sébastien Lecornu ने 2027 के बजट में €54 बिलियन की कटौती का प्रस्ताव रखा है, लेकिन संसद में बहुमत न होने के कारण इसे पास कराना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अगर यह राजनीतिक गतिरोध बना रहता है, तो 'फिस्कल डूम लूप' की स्थिति पैदा हो सकती है—जहां बढ़ती यील्ड्स सरकारी कर्ज चुकाने की लागत बढ़ा देती हैं, जिससे और भी सख्त मितव्ययिता (austerity) लागू करने का दबाव बढ़ता है और अंततः राजनीतिक अस्थिरता का खतरा पैदा होता है।
जर्मनी बनाम फ्रांस: बढ़ता अंतर
मार्केट एनालिस्ट फ्रांस के बॉन्ड्स और जर्मनी के 'Bunds' के बीच के स्प्रेड (yield spread) को बारीकी से देख रहे हैं। यह अंतर 150 बेसिस पॉइंट्स के करीब पहुंच गया है, जो 2011 के यूरोज़ोन क्राइसिस के बाद का सबसे बड़ा अंतर है। यह साफ बताता है कि निवेशक अब फ्रेंच डेट को जर्मन डेट के मुकाबले काफी अधिक जोखिम भरा मान रहे हैं। आने वाले समय में European Central Bank के फैसले और सरकार की बजट पास कराने की क्षमता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
