Indian Stock Market: विदेशी निवेशकों ने निकाले **$25 बिलियन**, AI की चमक के आगे फीका पड़ा भारत!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Stock Market: विदेशी निवेशकों ने निकाले **$25 बिलियन**, AI की चमक के आगे फीका पड़ा भारत!

साल **2026** में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का मोहभंग होता दिख रहा है। ग्लोबल स्तर पर AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश के क्रेज के कारण FII ने अब तक **$25 बिलियन** की बड़ी निकासी की है, हालांकि घरेलू निवेशकों का **$60 बिलियन** का निवेश बाजार के लिए ढाल बना हुआ है।

भारतीय शेयर बाजार इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। साल 2026 की शुरुआत से ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयरों से लगातार दूरी बनाई है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में विदेशी हिस्सेदारी 17 साल के निचले स्तर पर आ गई है।

क्यों छोड़ रहे हैं विदेशी निवेशक?

इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) और सेमीकंडक्टर इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर मची होड़ है। ग्लोबल फंड्स तेजी से अपना पैसा नॉर्थ एशिया (खासकर ताइवान और साउथ कोरिया) और अमेरिका के उन मार्केट में लगा रहे हैं, जहां AI क्रांति का सीधा फायदा दिख रहा है। भारत में अभी AI-लिंक्ड बड़े निवेश थीम की कमी है, जो ग्लोबल निवेशकों को उतना आकर्षित नहीं कर पा रही है।

घरेलू सपोर्ट का कवच

विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह नहीं ढहा है, और इसका पूरा श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) को जाता है। उन्होंने इस साल अब तक $60 बिलियन की खरीदारी की है, जिसने एक बड़ा 'सेफ्टी नेट' तैयार कर दिया है।

वैल्युएशन और जोखिम

बाजार के लिए अभी भी हाई वैल्युएशन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। निफ्टी (Nifty) अभी भी कई इमर्जिंग मार्केट्स के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये में कमजोरी का असर भी कॉर्पोरेट प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ रहा है। वर्तमान में वैश्विक मार्केट कैप में भारत की हिस्सेदारी गिरकर करीब 3% रह गई है। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि क्या विदेशी बिकवाली थमेगी या घरेलू संस्थागत निवेशक कब तक इस दबाव को झेल पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.