Indian Economy: देश की **7.8%** की रफ्तार फिर भी विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे हैं शेयर?

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Economy: देश की **7.8%** की रफ्तार फिर भी विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे हैं शेयर?

अप्रैल-जून **2026** की तिमाही में भारत की जीडीपी **7.8%** की दर से बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने **₹3.5 लाख करोड़** से ज्यादा की निकासी की है।

ब्याज दरों का घटता अंतर

विदेशी निवेशकों की इस सुस्ती के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मनी फ्लो का बदलना है। पहले विदेशी निवेशक भारत की ओर इसलिए खिंचे चले आते थे क्योंकि यहाँ की ब्याज दरों और विकसित देशों की दरों में बड़ा अंतर था। अब यह गैप काफी कम हो गया है। ग्लोबल रिस्क-फ्री रेट्स 4.8% तक पहुंच गए हैं, जबकि भारत की दरें 6.8% पर हैं। ऐसे में इंटरनेशनल फंड मैनेजर्स के लिए करेंसी-हेज्ड आधार पर भारतीय एसेट्स अब पहले जितने आकर्षक नहीं रहे।

महंगे वैल्यूएशन और AI का क्रेज

बाजार में एक और बड़ी चिंता शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन की है। फिलहाल भारतीय शेयर बाजार अपने पीई (P/E) मल्टीपल के हिसाब से काफी महंगे स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं। निवेशकों को डर है कि अगर कंपनियां उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ नहीं दिखा पाईं, तो कीमतों में गिरावट आ सकती है। साथ ही, ग्लोबल कैपिटल का रुझान इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाली कंपनियों की तरफ ज्यादा है, जबकि भारतीय बाजार कंजम्पशन और मैन्युफैक्चरिंग आधारित है।

कच्चे तेल की आग और भारत की स्थिति

भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। भारत जैसे बड़े एनर्जी आयातक के लिए यह किसी टैक्स से कम नहीं है, जो मुनाफे और व्यापार घाटे पर सीधा असर डालता है। हालांकि, इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी न समझें। अगस्त 2026 के अंत तक भारत का फॉरेक्स रिजर्व $740.8 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो किसी भी बड़े झटके को झेलने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.