त्योहारी सीजन के बीच महंगाई ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले चार महीनों में प्याज की कीमतों में **85%** और चीनी के दामों में **34%** का उछाल आया है, जिसका सीधा असर अब कंज्यूमर डिमांड और FMCG कंपनियों के मार्जिन पर पड़ता दिख रहा है।
त्योहारी सीजन के बीच रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो गया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, प्याज के दाम पिछले चार महीनों में 85% बढ़ चुके हैं, जबकि चीनी की कीमतें 34% महंगी हुई हैं। यह महंगाई ऐसे समय में बढ़ी है जब दिवाली के दौरान खरीदारी अपने पीक पर होती है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
सिर्फ प्याज ही नहीं, बाकी चीजों के भी बिगड़े भाव
महंगाई का दायरा काफी बड़ा है। अरहर दाल में 3.5% और चना दाल में 3.1% की बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, टमाटर के दाम पिछले एक महीने में 8.5% चढ़ गए हैं। ड्राई फ्रूट्स के दाम भी आसमान छू रहे हैं; प्रीमियम बादाम ₹1,300 प्रति किलो और इलायची की कीमत में ₹300 प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है।
RBI और इकॉनमी पर असर
फूड आइटम्स का Consumer Price Index (CPI) में बड़ा वेटेज होता है, जिसके चलते बढ़ती महंगाई RBI के लिए चुनौती बन गई है। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रिटेल इन्फ्लेशन को 4% (प्लस-माइनस 2%) के दायरे में रखना है। अगर फूड इन्फ्लेशन इसी तरह हाई रही, तो आने वाले समय में Monetary Policy Committee (MPC) के रेपो रेट फैसलों पर इसका दबाव साफ दिख सकता है।
FMCG सेक्टर की चुनौतियां
कंपनियों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है। FMCG सेक्टर जो कृषि कमोडिटी पर निर्भर है, उन पर मार्जिन का दबाव बढ़ रहा है। यदि कंपनियां इन बढ़ी हुई लागतों को ग्राहकों पर डालती हैं, तो रूरल और सेमी-अर्बन मार्केट्स में डिमांड कम होने का खतरा है। अब निवेशकों की नजरें रबी सीजन की फसल और कंपनियों के आगामी अर्निंग्स गाइडेंस पर टिकी हैं कि क्या त्योहारों में मांग बनी रहती है या महंगाई का असर सेल्स वॉल्यूम पर पड़ेगा।
