भारत-नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन: पावर प्रोजेक्ट्स और सप्लाई चेन पर भारी संकट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत-नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन: पावर प्रोजेक्ट्स और सप्लाई चेन पर भारी संकट

उत्तर भारत और नेपाल में भीषण बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा दी है। इस आपदा में **70** लोगों की जान गई है और **40 मेगावाट** के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत कई बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है।

भारी बारिश और बुनियादी ढांचे को नुकसान

मौसम की मार ने उत्तर भारत और नेपाल में जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर के बीच 66.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से करीब 9 गुना ज्यादा है। नेपाल में राहुगंगा नदी के उफान के कारण 40 मेगावाट की हाइड्रोपावर यूनिट को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें ट्रांसमिशन टावर और सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। साथ ही, ऑप्टिकल फाइबर लाइनें कटने से कई इलाकों में टेलीकॉम सेवाएं ठप पड़ गई हैं।

कृषि और लॉजिस्टिक्स पर खतरा

सेंट्रल वाटर कमीशन के अनुसार, देश के 7 राज्यों में 30 से अधिक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। उत्तर प्रदेश, जो कि कृषि का प्रमुख केंद्र है, वहां फसलों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इससे आने वाली तिमाहियों में आवश्यक वस्तुओं (essential commodities) की सप्लाई चेन बाधित हो सकती है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, 1,000 से ज्यादा घरों के विस्थापन से स्थानीय प्रशासन और लॉजिस्टिक्स पर बड़ा बोझ बढ़ गया है।

निवेशकों के लिए अहम संकेत (Key Monitorables)

बाजार के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि पावर ग्रिड की बहाली में कितना समय लगेगा और फसलों के नुकसान का सटीक आंकड़ा क्या होगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए मेंटेनेंस का खर्चा बढ़ सकता है और इंश्योरेंस क्लेम्स के आंकड़े भी आने वाले हफ्तों में देखने होंगे। अगर पावर और लॉजिस्टिक्स की ये बाधाएं लंबी खिंचीं, तो स्थानीय स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.