ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart में पिछले एक साल के भीतर **14** सीनियर अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। IPO की तारीख तय न होने के कारण कर्मचारियों के स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) की लिक्विडिटी पर असर पड़ा है, जिससे टैलेंट का रुख Swiggy और Zepto जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की ओर बढ़ गया है।
अंदरूनी हलचल का कारण
हाल ही में तीन वाइस प्रेसिडेंट्स—कंचन मिश्रा, अमित सचान और कमल चोपड़ा के इस्तीफे ने कंपनी में चल रही खींचतान को सतह पर ला दिया है। पिछले एक साल में 14 बड़े अधिकारियों का जाना वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली इस कंपनी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण कंपनी के बहुप्रतीक्षित IPO का न आना है।
ESOPs और टैलेंट का पलायन
Flipkart में काम करने वाले कई पुराने कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा उनके सैलरी पैकेज में स्टॉक ऑप्शंस के रूप में होता है। लेकिन, IPO की कोई निश्चित टाइमलाइन न होने के कारण ये शेयर्स कैश में नहीं बदले जा पा रहे हैं। इस अनिश्चितता के चलते कर्मचारी ऐसी कंपनियों में जा रहे हैं जहाँ पब्लिक लिस्टिंग की राह साफ है।
नेतृत्व में बदलाव और चुनौतियां
संस्थान के अनुभवी लोगों के जाने से कंपनी को काम के तरीके (Institutional Knowledge) में नुकसान हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, स्मार्टफोन बिजनेस को एक दशक से संभाल रहीं कंचन मिश्रा के जाने के बाद राकेश कृष्णन को कमान सौंपी गई है। ऐसे में जब बाजार में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा है, कंपनी के लिए नेतृत्व को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रतिद्वंद्वी कंपनियों का फायदा
Swiggy, Zepto और Blinkit जैसी कंपनियां इन अनुभवी प्रोफेशनल को अपने साथ जोड़ने के लिए एग्रेसिवली हायरिंग कर रही हैं। भले ही पैरेंट कंपनी Walmart का कहना है कि IPO उनके लॉन्ग-टर्म प्लान का हिस्सा है, लेकिन स्पष्ट तारीख न मिलने से अधिकारियों का भरोसा कम हो रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनी अपनी लिस्टिंग योजनाओं पर जल्द कोई खुलासा करती है या रिटेंशन स्ट्रैटेजी में कोई बड़ा बदलाव करती है।
