अगस्त के महीने में विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों पर जमकर भरोसा जताया और ₹29,628 करोड़ का निवेश किया, जिसमें फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर टॉप पर रहा। हालांकि, सितंबर की शुरुआत होते ही सेंटीमेंट बदल गए और बिकवाली का दौर शुरू हो गया है।
अगस्त की धमाकेदार खरीदारी
अगस्त का महीना विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए काफी आक्रामक रहा। भारतीय बाजारों में लगातार दूसरे महीने नेट बाइंग देखने को मिली है। इस दौरान फाइनेंशियल सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बना रहा, जिसमें अकेले ₹10,494 करोड़ का निवेश हुआ। यह कुल इनफ्लो का एक तिहाई से भी ज्यादा हिस्सा है। इसके अलावा, कंज्यूमर सर्विसेज में ₹8,417 करोड़ के साथ-साथ हेल्थकेयर, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी विदेशी फंडों ने काफी दिलचस्पी दिखाई है।
कहाँ से निकला पैसा?
जहाँ एक तरफ खरीदारी हुई, वहीं टेलीकॉम, एनर्जी और पावर जैसे सेक्टरों से फंड बाहर भी निकाले गए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल पोर्टफोलियो मैनेजर्स अपनी स्ट्रैटेजी बदल रहे हैं और उन क्षेत्रों से मुनाफा वसूली कर रहे हैं जो कमोडिटी से जुड़े हैं।
सितंबर में बदले समीकरण
अगस्त की तेजी सितंबर में आते ही ठंडी पड़ गई है। डेटा के मुताबिक, सितंबर के पहले हफ्ते में ही FPIs नेट सेलर्स बन गए और बाजार से ₹7,443 करोड़ निकाल लिए। इस बदलाव के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- US Bond Yields: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से इक्विटी के मुकाबले डेट मार्केट अधिक आकर्षक हो गया है।
- Strong Dollar: डॉलर के मजबूत होने से इमर्जिंग मार्केट्स में निवेश करना महंगा साबित हो रहा है।
- Crude Oil & Geopolitics: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं, वहीं वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
अब देखना यह होगा कि क्या भारतीय फाइनेंशियल स्टॉक इस ग्लोबल दबाव के बीच अपनी मजबूती बरकरार रख पाते हैं या निवेशक और अधिक मुनाफा वसूली की ओर बढ़ेंगे।
