Financial Literacy Gap: शेयर बाजार में निवेश करने वालों में से 64% को बेसिक जानकारी ही नहीं!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Financial Literacy Gap: शेयर बाजार में निवेश करने वालों में से 64% को बेसिक जानकारी ही नहीं!

भारत में निवेश का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है, जिसमें NSE के **2.5 करोड़** से ज्यादा अकाउंट और **28.62 करोड़** म्यूचुअल फंड फोलियो शामिल हैं। लेकिन SEBI के 2025 के सर्वे ने चौंकाने वाला सच सामने रखा है: केवल **36%** निवेशक ही बाजार के जोखिम और महंगाई के असर को सही से समझते हैं।

भारतीय शेयर बाजार में लोगों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही 'एक्सेस' और 'समझ' के बीच का फासला भी गहरा होता जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर रजिस्टर्ड क्लाइंट्स की संख्या 2.5 करोड़ को पार कर गई है और म्यूचुअल फंड फोलियो 28.62 करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं। हालांकि, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा सर्वे के नतीजे बताते हैं कि इनमें से अधिकांश लोग बिना तैयारी के बाजार में उतरे हैं।\n\n### डिजिटल ट्रेडिंग का भ्रम\n\nआज के दौर में ट्रेडिंग ऐप्स ने निवेश को एक क्लिक जितना आसान बना दिया है। यही सुविधा नए निवेशकों के लिए एक 'डबल-एज्ड स्वॉर्ड' (दोधारी तलवार) साबित हो रही है। लोग ऐप की सुविधा को ही फाइनेंशियल मैनेजमेंट समझ लेते हैं, जबकि बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान जानकारी का अभाव भारी पूंजी गंवाने का सबसे बड़ा कारण बनता है। बिना सही समझ के सोशल मीडिया की टिप्स पर भरोसा करना रिटेल पोर्टफोलियो को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।\n\n### कैसे बनें एक मैच्योर इन्वेस्टर?\n\nअसली फाइनेंशियल लिटरेसी का मतलब सिर्फ स्टॉक या फंड चुनना नहीं है। इसके लिए तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान देना जरूरी है:\n\n1. इमरजेंसी फंड: अनपेक्षित खर्चों के लिए पर्याप्त लिक्विड फंड बनाए रखना।\n2. इंश्योरेंस: सुरक्षा के लिए सही बीमा कवर होना।\n3. डेट मैनेजमेंट: कर्ज और क्रेडिट कार्ड के ब्याज का सही गणित समझना, क्योंकि यह शेयर बाजार के मुनाफे को शून्य कर सकता है।\n\nइसके अलावा, लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की समझ भी नेट रिटर्न बचाने के लिए जरूरी है। जैसा कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM अब ₹82 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है, अब वक्त आ गया है कि निवेशक 'संख्या' के बजाय 'गुणवत्ता' पर ध्यान दें। बाजार के शोर के बीच वही निवेशक टिक पाएगा जो अपनी जरूरतों और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से निवेश की रणनीति बनाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.