कंपनियों में फाइनेंस और HR लीडर्स अब सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव काम तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे कंपनी की मुख्य रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक **77%** फाइनेंस हेड्स के काम का दायरा बढ़ा है और HR स्किल्स की मांग में **23%** का इजाफा हुआ है।
आज के चुनौतीपूर्ण इकोनॉमिक माहौल में CFO (Chief Financial Officer) और CHRO (Chief Human Resources Officer) की भूमिकाएं पूरी तरह बदल गई हैं। ये अब बैक-ऑफिस सपोर्ट के बजाय सीधे कंपनी की स्ट्रेटजी तय करने में शामिल हो रहे हैं।
फाइनेंस का नया दायरा
CFO का पारंपरिक काम अब सिर्फ लेजर और रिपोर्टिंग तक नहीं रहा। आज के लीडर्स 'वैल्यू-बेस्ड कैपिटल एलोकेशन' पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे यह तय कर रहे हैं कि पैसा किन प्रोजेक्ट्स या टेक्नोलॉजी में लगाने से लंबा मुनाफा मिलेगा। 77% फाइनेंस लीडर्स मानते हैं कि उनकी जिम्मेदारी का दायरा काफी बढ़ गया है, जो शेयरहोल्डर्स के लिए बेहतर कैपिटल मैनेजमेंट का संकेत हो सकता है।
AI के दौर में वर्कफोर्स की चुनौती
HR लीडरशिप का फोकस अब सिर्फ भर्ती और रिटेंशन नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी के लिए वर्कफोर्स को तैयार करना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने से HR स्किल्स की मांग में 23% का उछाल आया है। कंपनी को यह भी देखना पड़ रहा है कि AI का काम और प्रोडक्टिविटी पर क्या असर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Risks)
इन बदलावों के साथ कुछ नए रिस्क भी जुड़े हैं:
- कैपिटल का गलत इस्तेमाल: अगर कंपनियां बिना सोचे-समझे महंगी टेक्नोलॉजी में निवेश करती हैं और प्रॉफिट नहीं बढ़ता, तो यह CFO की स्ट्रैटेजिक चूक मानी जाएगी।
- कॉर्पोरेट कल्चर: ऑटोमेशन और डेटा-ड्रिवेन टूल्स के चक्कर में कहीं एंप्लॉई प्रोडक्टिविटी और तालमेल न बिगड़ जाए।
- गवर्नेंस: लीडर्स को ज्यादा पावर मिलने के साथ ही इंटरनल कंट्रोल्स का मजबूत होना भी जरूरी है। निवेशकों को कंपनी की एनुअल रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि नई पहल का असल नतीजा क्या निकल रहा है।
