नई दिल्ली में आयोजित 5वें Kautilya Economic Conclave में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर जोर दिया है।
नई दिल्ली में 3 अक्टूबर, 2026 से शुरू हुए 5वें Kautilya Economic Conclave (KEC 2026) में नीति निर्माताओं और आर्थिक विशेषज्ञों का जमावड़ा लगा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'Resilience in an Age of Flux: India's Economic Priorities' सत्र के दौरान बताया कि कैसे भारत वैश्विक कर्ज और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद अपनी विकास दर को बरकरार रखने में सक्षम है।
आर्थिक मजबूती के मुख्य आधार
सरकार की रणनीति घरेलू स्तर पर ऐसे मजबूत पिलर्स बनाने की है, जो बाहरी झटकों को सोख सकें। इस कड़ी में बैंकिंग सेक्टर पर खास फोकस है। बीते वर्षों में बैलेंस शीट सुधारने के बाद अब बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता पर जोर दिया जा रहा है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है क्योंकि एक मजबूत बैंकिंग सेक्टर ही इंडस्ट्री को जरूरी क्रेडिट और लिक्विडिटी उपलब्ध कराता है।
इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट भी सरकार की प्राथमिकता में बना हुआ है। सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी पर भारी कैपिटल स्पेंडिंग का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है, जिससे औद्योगिक उत्पादकता में सुधार हो सके।
ग्लोबल रिस्क और महंगाई प्रबंधन
भले ही घरेलू ग्रोथ की कहानी मजबूत है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ट्रेड फ्रैगमेंटेशन और बढ़ते कर्ज का खतरा बना हुआ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पहले ही साफ कर दिया है कि वैश्विक स्थितियों के चलते बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार लगातार कृषि सप्लाई चेन और जरूरी कमोडिटीज की मॉनिटरिंग कर रही है।
यह कॉन्क्लेव 5 अक्टूबर, 2026 तक जारी रहेगा। बाजार के जानकारों की नजर अब इस इवेंट से निकलने वाले उन संकेतों पर है, जो भविष्य की पॉलिसी और राजकोषीय लक्ष्यों (Fiscal Targets) के बारे में संकेत देंगे।
