फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Kevin Warsh ने साफ कर दिया है कि महंगाई को **2%** के टारगेट पर लाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी संभव है। सितंबर में रेट हाइक की संभावना **60%** तक पहुंच गई है, जिससे भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बाजार का बदला मूड
Jackson Hole Symposium में फेड चेयरमैन Kevin Warsh का बयान उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत रहा। मार्केट पहले मानकर चल रहा था कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर अब खत्म हो चुका है, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। फेड अब किसी तय रास्ते पर चलने के बजाय आने वाले आर्थिक आंकड़ों (Data-dependent approach) के आधार पर फैसला लेगा, जिससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है।
सितंबर का डेटा तय करेगा दिशा
निवेशकों की नजरें अब पूरी तरह 11 सितंबर, 2026 को आने वाले US कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा पर टिकी हैं। अगर महंगाई उम्मीद के मुताबिक कम नहीं होती है, तो 15-16 सितंबर को होने वाली FOMC मीटिंग में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की पक्की संभावना है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है:
- कैपिटल आउटफ्लो: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड (Yield) बढ़ने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा सकते हैं।
- रुपये पर दबाव: डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये में गिरावट आ सकती है, जिससे आयात महंगा होगा।
- वोलाटिलिटी: बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की पूरी संभावना है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो ग्लोबल फंडिंग पर निर्भर हैं।
महंगाई के मोर्चे पर जियोपॉलिटिकल टेंशन और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें पहले से ही चुनौती बनी हुई हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे 11 सितंबर के आंकड़ों को ट्रैक करें क्योंकि यही डेटा तय करेगा कि आने वाले महीनों में बाजार का रुख क्या होगा।
