28 अगस्त 2026 को US Federal Reserve के चेयरमैन Kevin Warsh अपना पहला कीनोट भाषण देंगे। महंगाई और इंटरेस्ट रेट्स पर उनके स्टैंड का इंतजार पूरी दुनिया के निवेशकों को है, जो सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट की चाल तय करेगा।
बाजार की नजरें क्यों हैं टिकीं?
27 से 29 अगस्त 2026 के बीच हो रहे Jackson Hole Economic Policy Symposium में इस बार माहौल काफी गंभीर है। निवेशकों की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या Kevin Warsh, मई 2026 में पद संभालने के बाद पहली बार, अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे। Warsh ने अब तक पारंपरिक 'फॉरवर्ड गाइडेंस' के तरीके को बदला है, जिससे मार्केट कन्फ्यूज है और बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ गया है। निवेशक अब उनसे 2% के महंगाई लक्ष्य पर स्पष्ट कमिटमेंट की उम्मीद कर रहे हैं।
बॉन्ड मार्केट और रेट हाइक का डर
फिलहाल, फेडरल फंड्स रेट 3.5% से 3.75% के बीच है। मार्केट में चर्चा है कि आने वाले समय में रेट हाइक की संभावना 40% है। लॉन्ग-टर्म ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) में बढ़ोतरी ने भी चिंता बढ़ा दी है। जुलाई की मीटिंग में 3 FOMC अधिकारियों के असहमति जताने से साफ है कि फेड के अंदर भी नीतिगत फैसलों को लेकर मतभेद हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए संकेत
भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के लिए यह इवेंट बहुत महत्वपूर्ण है। अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशक (FIIs) अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगा सकते हैं, जिसका दबाव भारतीय रुपये और शेयर बाजार पर दिख सकता है। अगर Warsh महंगाई को काबू करने के लिए ऊंचे ब्याज दरों को लंबे समय तक जारी रखने का संकेत देते हैं, तो भारतीय बाजार में FIIs का रुझान घट सकता है।
फिलहाल, मार्केट 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है और 28 अगस्त को होने वाला भाषण बाजार की अगली दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा।
