FSSAI का बड़ा फैसला: अब पैकेट बंद खाने पर लगेगा लाल 'हेक्सागन' निशान, FMCG कंपनियों की बढ़ेगी चुनौती

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AuthorAditya Rao|Published at:
FSSAI का बड़ा फैसला: अब पैकेट बंद खाने पर लगेगा लाल 'हेक्सागन' निशान, FMCG कंपनियों की बढ़ेगी चुनौती

FSSAI ने अब पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य 'रेड हेक्सागन' लेबलिंग का प्रस्ताव रखा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आया यह कदम नमक, चीनी और फैट की अधिकता वाले प्रोडक्ट्स की पोल खोलेगा, जिसका सीधा असर भारतीय FMCG कंपनियों के कारोबार पर पड़ सकता है।

नियम का पूरा सच

फूड रेगुलेटर FSSAI ने एक कड़े लेबलिंग सिस्टम की तैयारी शुरू कर दी है। अब चिप्स, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे प्रोडक्ट्स के पैकेट के सामने वाले हिस्से पर लाल रंग का एक हेक्सागन (षट्भुज) निशान होगा। यह निशान उन उत्पादों पर अनिवार्य होगा जिनमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा तय सीमा से 1% भी ज्यादा होगी। FSSAI का लक्ष्य है कि अगले 4 महीनों के भीतर कंसल्टेशन प्रक्रिया पूरी कर इस नियम को फाइनल रूप दिया जाए।

FMCG सेक्टर पर क्या होगा असर?

यह बदलाव कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अब स्नैक्स और बेवरेज बनाने वाली कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स की रेसिपी बदलनी पड़ सकती है, ताकि वे इन कड़े नियमों के दायरे में आने से बच सकें। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि जिन कंपनियों के पोर्टफोलियो में जंक फूड ज्यादा है, उन पर मार्केटिंग खर्च का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, जो कंपनियां हेल्थ-कॉन्शियस विकल्प पेश करेंगी, उन्हें मार्केट में बढ़त मिल सकती है।

ग्लोबल ट्रेंड और निवेश की दृष्टि

चिली, मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों में इसी तरह की वार्निंग लेबलिंग सिस्टम पहले से लागू है, जिसके चलते वहां की कंपनियों ने अपनी प्रोडक्ट्स में शुगर और सोडियम की मात्रा कम की है। भारतीय निवेशकों को अब यह देखना होगा कि FSSAI अंतिम थ्रेशोल्ड लिमिट क्या तय करता है और कंपनियां इसे कैसे लागू करती हैं। कंपनी के मौजूदा इन्वेंट्री मैनेजमेंट और ब्रांड इमेज पर पड़ने वाले असर को ट्रैक करना जरूरी होगा, क्योंकि ये नए नियम ब्रांड की बिक्री और कंज्यूमर बिहेवियर को सीधे प्रभावित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.