FSSAI Policy Shift: रेड के बजाय रिस्क-बेस्ड नियमों की मांग, फूड इंडस्ट्री के लिए क्या हैं संकेत?

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AuthorAditya Rao|Published at:
FSSAI Policy Shift: रेड के बजाय रिस्क-बेस्ड नियमों की मांग, फूड इंडस्ट्री के लिए क्या हैं संकेत?

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कामकाज के तरीके में बड़े बदलाव की मांग उठ रही है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि बार-बार छापेमारी के बजाय एक डिजिटल और रिस्क-बेस्ड कंप्लायंस मॉडल को अपनाया जाए, जिससे फूड एंड बेवरेज सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ सके।

भारतीय फूड एंड बेवरेज सेक्टर में रेगुलेटरी बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल FSSAI का मौजूदा मॉडल 'रेड-सेंट्रिक' और दंडात्मक है, लेकिन अब इसे एक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और सिस्टमैटिक फ्रेमवर्क में बदलने की वकालत की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सरप्राइज इंस्पेक्शन को खत्म कर एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ना है जो लगातार और पारदर्शी कंप्लायंस पर आधारित हो।

इंडस्ट्री के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव?

बड़ी FMCG कंपनियों, रेस्टोरेंट चेन्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए रेगुलेटरी स्पष्टता बिजनेस के लिए बेहद जरूरी है। मौजूदा सिस्टम में छोटी प्रशासनिक चूक को भी बड़ी गलती की तरह देखा जाता है, जो छोटी कंपनियों के लिए भारी नुकसान का कारण बनती है। एक रिस्क-बेस्ड फ्रेमवर्क से असली मिलावटखोरों और छोटी-मोटी कागजी गलतियों के बीच फर्क करना आसान होगा, जिससे काम में रुकावटें कम होंगी।

निवेशकों के लिए संकेत

इन्वेस्टर्स के लिहाज से यह पॉलिसी काफी अहम है। अगर इंस्पेक्शन और सेफ्टी मैट्रिक्स का डेटा सार्वजनिक होता है, तो कंपनियों की सप्लाई चेन की सच्चाई सामने आएगी। इससे बड़े ब्रांड्स और संगठित क्षेत्र के खिलाड़ियों को फायदा होगा क्योंकि उनकी स्टैंडर्डाइज्ड कंप्लायंस लागत में कमी आ सकती है।

क्या हैं चुनौतियां?

बेशक, डिजिटल चेकलिस्ट और सेल्फ-डिक्लेरेशन की ओर बढ़ने के लिए तगड़ी टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। छोटे प्लेयर्स के लिए यह थोड़ा महंगा और पेचीदा हो सकता है, जिससे शुरुआती दौर में सप्लाई चेन में कुछ समय के लिए रुकावटें आ सकती हैं। अब देखना यह है कि क्या रेगुलेटर पायलट प्रोग्राम के जरिए इस डिजिटल बदलाव की शुरुआत करता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.